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FIR पर तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी… POCSO के दुरुपयोग पर SC ने तय की गाइडलाइंस; ये 3 नियम बनाए | supreme-court-pocso-act-misuse-child-custody-cases-no-automatic-arrest-guidelines-false-fir-quashed



नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद और बच्चों की कस्टडी के मामलों में POCSO एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए गाइडलाइन जारी की हैं. ये गाइडलाइन उस मामले से जुड़ी है जिसमें एक पिता पर अपनी ही नाबालिग बेटी के यौन शोषण के आरोप में FIR दर्ज की गई थी. हालांकि, CBI जांच में आरोप झूठे पाए गए, जिसके बाद कोर्ट ने FIR को रद्द कर दिया.

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच तलाकशुदा दंपति के बीच बेटी की कस्टडी को लेकर चल रहे मामले की सुनवाई कर रही थी. कोर्ट ने कहा कि POCSO जैसे गंभीर कानून का इस्तेमाल कस्टडी की लड़ाई में हथियार की तरह बढ़ता जा रहा है.

SC ने तय किए 3 बड़े सुरक्षा उपाय:

  • FIR दर्ज होते ही ऑटोमैटिक गिरफ्तारी नहीं: सिर्फ POCSO के तहत FIR दर्ज होने से आरोपी को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.
  • एक्सपर्ट की मदद अनिवार्य: जांच के दौरान बाल मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की मदद ली जाएगी ताकि बच्चे पर दबाव या ट्यूटरिंग का पता चल सके.
  • प्राइवेट शिकायतों पर सतर्कता: POCSO स्पेशल कोर्ट में सीधे दायर होने वाली निजी शिकायतों पर कोर्ट अतिरिक्त सावधानी बरतेगा.

झूठे आरोपों पर क्या कहा?

बेंच ने कहा कि POCSO की धारा 22 में झूठी शिकायत के लिए सजा का प्रावधान तो है, लेकिन तब तक झूठे आरोप झेल रहे पक्ष को काफी नुकसान हो चुका होता है, चाहे लंबी जेल हो या कस्टडी केस पर असर.

कोर्ट ने कहा, ‘कानून के दायरे में ही कुछ सावधानियां बरतनी होंगी ताकि आरोपी को अपूरणीय क्षति से बचाया जा सके.’

कोर्ट ने साफ किया कि ये सावधानियां ऐसी होनी चाहिए जो न तो कानून के उद्देश्य को कमजोर करें और न ही इसकी कठोरता को घटाएं, बल्कि एक संतुलन बनाएं जिससे निर्दोष को नुकसान न हो.

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