

नई दिल्ली:
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव के आज नतीजे आ रहे हैं. यह चुनाव ऐसे समय में हुए हैं, जब कुछ दिन पहले ही जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन हुआ था. इसके अलावा साउथ कैंसप के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी के ढह जाने से उसमें रहने वाले 7 छात्रों की मौत हो गई थी. ऐसे में DUSU के नए पदाधिकारियों के सामने भरोसा बहाल करने का संकट होगा तो वहीं छात्रों की असुविधाएं भी खत्म करने पर फोकस करना होगा. DUSU चुनाव के नतीजे चाहे किसी के पक्ष में जाएं, लेकिन नए अध्यक्ष के सामने चुनौतियों की लंबी सूची होगी. छात्र चुनाव के दौरान जिन मुद्दों की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, अब उन पर काम करने का दबाव भी नए नेतृत्व पर रहेगा.
सबसे बड़ा मुद्दा दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की कमी का है. बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराये के कमरों में रहने को मजबूर हैं. हाल के दिनों में पीजी की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिससे आवास का मुद्दा और बड़ा हो गया है. दिल्ली सरकार ने भले ही 10 हजार छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने का ऐलान कर दिया है, लेकिन यह कहां बनेंगे और कैसे बनेंगे. इस पर टाइमलाइन से लेकर गुणवत्ता तक पर छात्र संघ को विचार करना होगा. उसे इसे लिए सरकार पर दबाव बनाए रखना होगा. डीयू का एक ग्लैमर रहा है और बुनियादी सुविधाओं के बिना उसे बनाए रख पाना संभव नहीं होगा.
महिला सुरक्षा, कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के लिए सुरक्षित आवागमन भी प्रमुख मांगों में शामिल हैं. इसके अलावा मेट्रो पास, बढ़ती फीस, कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की जरूरत लगातार उठती रही है. बीते कुछ सालों में डीयू के छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, लेकिन इन्फ्रा की गति उतनी नहीं है. कॉलेजों के परिसर वही हैं और बस आदि की सुविधाएं भी वही हैं. ऐसे में अब नई जरूरतों के अनुसार विकास करना होगा. इसके अलावा सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज के नाम पर फीस में ज्यादा बढ़ोतरी न हो, इसे लेकर भी छात्र संघ को प्रयास करने होंगे.
छात्रों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों को अब जमीन पर उतारने का समय है. ऐसे में नया DUSU अध्यक्ष सिर्फ राजनीतिक जीत के आधार पर नहीं, बल्कि इन मुद्दों पर अपने काम के आधार पर आंका जाएगा. बता दें कि डीयू छात्र संघ चुनाव में आमतौर पर संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और कांग्रेस के NSUI के बीच ही मुकाबला रहा है.





