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मरे हुए इंसान को जिंदा कर देते थे ‘नीम करोली बाबा’, पोते ने किए रोचक खुलासे | Neem Karoli Baba used to bring the dead back to life grandson makes fascinating revelations



नई दिल्ली:

फिल्म हनुमान अंश (Hanuman Ansh) बीते दिनों सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म को दर्शकों का बहुत प्यार मिल रहा है. बाबा नीम करौली के भक्त भी इस फिल्म में अपने बाबा की जीवन यात्रा को देखने के लिए सिनेमाघरों की तरफ रुख कर रहे हैं. शुरुआत में इस फिल्म का कलेक्शन काफी कम था. लेकिन फिल्म की दमदार स्क्रिप्ट और माउथ पब्लिसिटी की वजह से फिल्म चर्चाओं में आ गई और इस फिल्म ने आज के समय बड़े से बड़े एक्टर्स की फिल्म को पीछे छोड़ दिया है. फिल्म का शानदार बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगातार जारी है. फिल्म की कास्ट भारत के कई शहरों में फिल्म का प्रचार प्रसार कर रही है. बाबा नीम करोली को एक चमत्कारी संत कहा जाता था. जिन्होंने काफी बड़े-बड़े चमत्कार किए थे. बाबा नीम करोली के बड़े बेटे अनेक सिंह भोपाल में रहते थे और उनके परिवार आज भी भोपाल में रहता है. उनके पोते डॉ. धनंजय शर्मा (Dr. Dhananjay Sharma) ने एनडीटीवी से बात करते हुए बाबा के बारे में काफी राज खोले.

मरे हुए इंसान को कर देते हैं जिंदा

नीम करोली बाबा के पोते धनंजय शर्मा ने बाबा नीम करोली के बारे में काफी बातें कहीं. उन्होंने कहा कि फिल्म हनुमान अंश के माध्यम से बाबा नीम करोली का नाम सुनाई दे रहा है. मुझे काफी खुशी हो रही है कि मेरे बाबा का हर किसी के घर में प्रवेश हो गया है. हर कोई उनके चमत्कारों को मानने लगे हैं. उनके चमत्कारों से रूबरू हो रहे हैं. बाबा तो विचित्र संत थे. उनके लिए देवरा बाबा ने कहा था कि नीम करोली बाबा तो खेल करता रहता है. वह कहीं नहीं गया, यहीं पर है. एक संत धरती पर ऐसा है जो मरे हुए इंसान को जिंदा कर देता है. वो है बाबा नीम करोली, ऐसा उनके बारे में कहा जाता था. बाबा नीम करोली वो संत थे. उन जैसा अभी तक कोई भी पैदा नहीं हुआ है. वह मानव सुधार के लिए ही इस दुनिया में आए थे और उन्होंने अब समाधि ले ली.

जब धनंजय से पूछा कि आपने हनुमान अंश देखी? इस बात पर उन्होंने कहा कि हां मैं दो-तीन बार फिल्म को देख चुका हूं बस मेरी तमन्ना है कि भोपाल में बाबा नीम करौली का एक आश्रम बने. अब मैं रिटायर हो गया हूं, मैं फिजिकल स्पेशलिस्ट था. अब मेरा यह मन है कि भोपाल में बाबा नीम करौली के एक शानदार आश्रम बने. जब भोपाल में हमारा मकान बन रहा था, तब 1970 में बाबा यहां आए थे और लगभग 10 दिन रहे थे. हमारे घर में 10 दिनों तक लगातार अखंड हनुमान चालीसा का पाठ होता था. हम भोपाल में जवाहर चौक पर रहते थे, वहां से बाबा के लिए रोज खाना लेकर आते थे. जाते-जाते बाबा मेरे पिताजी से बोल कर गए कि आपके घर में कभी भी मृत्यु नहीं होगी. मेरे पिताजी की डेथ भी भोपाल के अस्पताल में हुई थी. वह भी मेरे दादाजी की बहुत पूजा करते थे.

पत्थर की लकीर होती थी

धनंजय ने आगे कहा कि बाबा जो बोल देते थे. वो बात पत्थर की लकीर होती थी. मेरी बेटी का भी जन्मदिन उसी दिन था, जिस दिन बाबा नीम करोली ने समाधि ली थी और मेरी बहन बाबा नीम करोली की गोद में ही पैदा हुई थी. आप समझ सकते हैं कि मेरी बहन कितनी भाग्यशाली है. वह अब आगरा में रहती है. हम सभी मेरी बहन का जन्मदिन मना कर लौटे थे और सुबह हमको समाचार मिला कि बाबा नीम करोली इस दुनिया में नहीं रहे. हमारे परिवार पर बाबा नीम करोली की कृपा है. मेरा तो सारा काम बाबा नीम करोली करते हैं, जो भी मेरे मन में होता है, वह मेरी बात सुनते हैं.

अगर फिल्म हनुमान अंश के अभी तक की कलेक्शन की बात करें तो वर्ल्डवाइड इस फिल्म ने 309 करोड रुपये के आसपास का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया है. फिल्म का कलेक्शन लगातार बढ़ता जा रहा है और दर्शक इस फिल्म में बाबा नीम करोली की जीवन यात्रा को देख रहे हैं.

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