

1967 में आई फिल्म ‘बहारों के सपने’ के गानों में आर.डी. बर्मन की संगीत शैली की अलग पहचान सुनाई देती है. इसी फिल्म का गाना ‘चुनरी संभाल गोरी’ आज भी पुराने हिंदी फिल्मी गीतों को पसंद करने वालों के बीच याद किया जाता है. लता मंगेशकर और मन्ना डे की आवाज में रिकॉर्ड हुए इस गीत को मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था और संगीत आर.डी. बर्मन का था. पर्दे पर आशा पारेख और राजेश खन्ना नजर आए थे. क्या हैं इस गाने से जुड़े और दिलचस्प फैक्ट्स, चलिए आपको बताते हैं.
लता-मन्ना डे की आवाज ने गाने में भरी शरारत
‘चुनरी संभाल गोरी, उड़ी चली जाए रे’ की शुरुआत ही बेहद चंचल अंदाज में होती है. गीत में एक लड़की को अपनी उड़ती चुनरी संभालने की बात कही गई है और इसी बहाने मजरूह सुल्तानपुरी ने प्यार, शरारत और मस्ती से भरे बोल लिखे. गाने की खास बात यह है कि लता मंगेशकर की सुरीली आवाज और मन्ना डे की दमदार गायिकी एक-दूसरे के साथ खूबसूरती से मेल खाती है. गाने की धुन में राजस्थान के लोक रंग का एहसास मिलता है और आर.डी. बर्मन ने इसे नाचने-गाने वाले हल्के-फुल्के माहौल के हिसाब से सजाया.
ये Video भी देखें: Haiwaan Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी का कमाल या निराशा?
आशा पारेख के डांस ने गाने को बनाया यादगार
‘चुनरी संभाल गोरी’ की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका फिल्मांकन भी है. आशा पारेख पर फिल्माए गए इस गीत में उनका डांस और एक्सप्रेशन गाने की मस्ती को पर्दे पर उतार देते हैं. उनके साथ राजेश खन्ना भी दिखाई देते हैं. गाने को एक डांस नंबर के तौर पर फिल्माया गया था और इसमें कई कलाकारों को गीत देखते-सुनते हुए दिखाया गया है.
‘बहारों के सपने’ में आर.डी. बर्मन का अलग अंदाज
‘बहारों के सपने’ नासिर हुसैन की फिल्म थी, जिसमें आशा पारेख और राजेश खन्ना मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म का संगीत आर.डी. बर्मन ने दिया था और इसके गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. फिल्म में ‘आजा पिया तोहे प्यार दूं’, ‘क्या जानूं सजन’ और ‘ओ मेरे सजना’ जैसे गाने भी शामिल थे. आर.डी. बर्मन के शुरुआती दौर के इस संगीत में अलग-अलग तरह की धुनों के साथ प्रयोग दिखाई देता है. खुद आर.डी. बर्मन ने बाद में एक बातचीत में ‘चुनरी संभाल गोरी’ को अपने शुरुआती कामों में याद किया था.
यही वजह है कि 59 साल बाद भी जब पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की बात होती है तो ‘चुनरी संभाल गोरी’ का नाम सामने आता है. लता मंगेशकर और मन्ना डे की आवाज, मजरूह के चुलबुले बोल और आशा पारेख की अदाएं मिलकर इस गीत को 1960 के दशक के यादगार डांस नंबरों में शामिल करती हैं.





