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फिलिस्तीनी राष्ट्रपति को अमेरिका ने लगातार दूसरे साल नहीं दिया वीजा, UN जनरल असेंबली में नहीं हो पाएंगे शामिल | US again denies Palestinian President leader Abbas visa to attend UN assembly amid Israel War



फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UN जनरल असेंबली में शामिल नहीं हो पाएंगे. वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने महमूद अब्बास को एंट्री वीजा देने से इनकार कर दिया है. एक अलग बयान में, अमेरिकी विदेश विभाग ने फिलिस्तीनी अथॉरिटी और अन्य संगठनों पर सुधार न कर पाने का आरोप लगाया. यह लगातार दूसरा साल है जब अमेरिका ने अब्बास को वीजा देने से इनकार किया है.

महमूद अब्बास फिलिस्तीन के राष्ट्रपति हैं. वे फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के प्रमुख भी हैं. बता दें कि फिलिस्तीन राज्य मुख्य रूप से दो भौगोलिक क्षेत्रों, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर अपना दावा करता है, और कहता है कि राजधानी पूर्वी यरुशलम है. हालांकि, जमीनी हकीकत में इन क्षेत्रों के कई हिस्सों पर इजरायल का सैन्य नियंत्रण या पाबंदियां हैं और वर्तमान प्रशासनिक केंद्र रामल्लाह में स्थित है.

अमेरिका का क्या कहना है?

अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को कहा कि फिलिस्तीनी अधिकारियों, जिनमें फिलिस्तीनी अथॉरिटी के प्रेसिडेंट महमूद अब्बास भी शामिल हैं, ने इजरायल के साथ शांति के लिए पहले हुए समझौतों के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं किया है. विभाग ने एक बयान में कहा कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में इजरायल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखी है. साथ ही, इजराइलियों पर हमलों के दोषी कैदियों के परिवारों को पैसे देना भी जारी रखा है. इसमें फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) से जुड़े अधिकारियों का भी जिक्र किया गया.

विभाग ने कहा, “सुधार करने में उनकी नाकामी, अमेरिका से किए गए वादों के उलट काम करने और शांति की संभावनाओं को कम करने वाली उनकी लगातार गतिविधियों के कारण, अमेरिका PLO सदस्यों और PA अधिकारियों को वीजा न देने वाले प्रतिबंधों को आगे भी जारी रखेगा.” 

यह कदम मौजूदा अमेरिकी कानून के मुताबिक उठाया गया है.

वीजा पर रोक लगाने के लिए ट्रंप प्रशासन का यह कदम इजरायल के साथ अमेरिका की करीबी दोस्ती को भी दिखाता है. हमास के 7 अक्टूबर, 2023 के घातक हमलों के बाद गाजा में युद्ध की वजह से इजरायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया है. अक्टूबर में अमेरिका की मध्यस्थता से एक नाजुक सीजफायर (युद्धविराम) लागू हुआ था, लेकिन इजरायल ने फिलिस्तीनी इलाकों में हमले जारी रखे हैं.

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