
Balram Jayanti 2026: बलराम जयंती भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित पर्व है. उन्हें बलदाऊ, हलधर और बलदेव जैसे नामों से भी जाना जाता है. भगवान बलराम के हाथ में हल और मूसल उनके स्वरूप की खास पहचान हैं. धार्मिक परंपरा में उन्हें शेषनाग का अवतार माना गया है. यही वजह है कि बलराम जयंती को शक्ति, कृषि, धर्म और संतान से जुड़ी मान्यताओं के साथ भी देखा जाता है.
बलराम जयंती पूजा मुहूर्त
सुबह 11.02 – दोपहर 1.30
हल की पूजा करने से क्या होता है
- बलराम जयंती पर संतान की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य के लिए भगवान बलराम की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है. बलराम जी का प्रमुख अस्त्र हल था, इसलिए इस दिन हल और उससे जुड़ी कृषि परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है.
- मान्यता है कि हल की पूजा से घर में अन्न और धन की कमी नहीं रहती.
- किसान अच्छी फसल और खेतों की उर्वरता की कामना से हल की पूजा करते हैं.
- हल धारण करने के कारण उन्हें हलधर कहा गया और कृषि से उनका गहरा संबंध स्थापित हुआ.
शेषनाग के अवतार क्यों माने जाते हैं बलराम?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के शयन के लिए शेषनाग को उनका दिव्य आधार माना गया है. द्वापर युग में यही शेषनाग भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के रूप में प्रकट हुए. इसी कारण बलराम जी को शेषनाग का अवतार कहा जाता है.
इसी वजह से कई लोग हल से जुते हुए खेत से प्राप
बलराम जयंती पर क्या खाएं, क्या नहीं
फल, दूध, दही, मखाना, सिंघाड़ा, साबूदाना और कंद-मूल जैसे फलाहारी पदार्थ बलराम जयंती पर खा सकते हैं लेकिन इस दिन हल से जुती भूमि में पैदा हुए अनाज का त्याग किया जाता है. इसका संबंध भगवान बलराम के हलधर स्वरूप से जोड़ा जाता है.
भगवान बलराम के मन्त्र
- ॐ हलधाराय संकर्षणाय नमः।
- ॐ क्लीं हलधर बलभद्राय नमः।
- ॐ अश्त्रहस्ताय विद्महे पीताम्बराय धीमहि।
तन्नो बलराम प्रचोदयात्॥
बलराम जयंती पूजा विधि
- बलराम जयंती के दिन व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद भगवान बलराम के चित्र को चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर रखना चाहिए.
- इसके बाद उस चित्र पर पवित्र जल छिड़कें. इसके बाद पीले रंग के पुष्प, हल्दी, चंदन, रोली, अक्षत, फल, वस्त्र, भोग आदि लगाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करें.
- बलराम सहस्त्रनाम का पाठ करें. उनके मंत्रों का जप अवश्य करें. मंत्र जप के बाद शंख ध्वनि करें तथा श्रद्धा और विश्वास के साथ बलराम जी की आरती करें.
- आरती के बाद पूजा में हुई भूल-चूक अथवा किसी कमी के लिए माफी मांगते हुए अपनी कामना उनके सामने कहें.
- ब्राह्मण को दान देने के बाद ही फलाहार करें.
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