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दीदी आई मिस यू… TMC की बागी सांसद शताब्दी रॉय ने ममता बनर्जी के लिए ये क्या कह गईं? | Rebel MP Satabdi Roy Opens Up After Leaving TMC said Didi I Miss You



पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में लगातार फूट की खबरें सामने आ रही हैं. पहले ही ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में कई विधायकों ने अलग गुट बना लिया. ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा के नेता विपक्ष भी बन गए. इसके बाद अब पार्टी के कई सांसदों ने भी बगावत कर दी है. इन्हीं में से एक हैं शताब्दी रॉय. पार्टी से बगावत करने के वाली शताब्दी ने NDTV से बातचीत की. जब उनसे पूछा गया कि वो ममता बनर्जी को क्या कहना चाहेंगी? इसके जवाब में शताब्दी ने कहा- ‘दीदी आई मिस यू.’ यानी वो ममता बनर्जी को याद करती हैं.

बागी सांसद शताब्दी रॉय ने टीएमसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने आंतरिक शिकायतों को नजरअंदाज किया, चुनावी हार की समीक्षा नहीं की और भ्रष्टाचार व अति-आत्मविश्वास को संगठन को कमजोर करने दिया गया.

‘इतने लोग नाराज, पार्टी पर भी आती है जिम्मेदारी’

शताब्दी रॉय ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि पार्टी छोड़ने या विद्रोह करने वाले नेताओं की बढ़ती संख्या को केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं माना जा सकता, बल्कि यह संगठन के भीतर गहरी समस्याओं का संकेत है. उन्होंने कहा, “इतने सारे लोग पार्टी छोड़ चुके हैं या असंतुष्ट हैं.इसे केवल उनकी व्यक्तिगत गलती नहीं कहा जा सकता. जब बड़ी संख्या में लोग नाराज हों, तो इसकी जिम्मेदारी पार्टी पर भी आती है. पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं का ध्यान रखना चाहिए था.”

रॉय ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी कमियों में से एक चुनावी हार के कारणों की समीक्षा न करना है. उन्होंने कहा, ‘हार के बाद कभी गंभीर चर्चा नहीं हुई कि हम क्यों हारे. जब तक हार के कारणों का विश्लेषण नहीं होगा, गलतियों को सुधारा नहीं जा सकता. हर संगठन अपनी असफलताओं की समीक्षा करता है, राजनीतिक दलों को भी ऐसा करना चाहिए.’

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ गया है. किसी ने कल्पना नहीं की थी कि भ्रष्टाचार इस स्तर तक पहुंच जाएगा. जो बातें अब सामने आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं. पार्टी को इन मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए.’ उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी और सरकार को जमीनी स्तर पर हो रही गतिविधियों की जानकारी नहीं थी. अगर सरकार और पार्टी को इन घटनाओं की जानकारी नहीं थी, तो यह भी एक बड़ी विफलता है और यदि जानकारी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, तो जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है.




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