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सात फेरों के सात वचन याद दिलाता है 44 साल पुराना सुपरहिट गाना, आशा भोसले की आवाज में अमर, हर शादी की है शान | Saat pheron Ke seven promise Reminds 44 years Old Superhit Song sung by Asha Bhosle Made Immortal now wedding pride



नई दिल्ली:

80 के दौर में परिवार के रिश्तों पर कई फिल्में बनीं, जिसमें भाई बहन के प्यार से लेकर माता-पिता के सम्मान को दिखाया जाता था. इन्हीं में से एक 1985 में आई फिल्म थी, जिसमें तनुजा, सचिन पिलगांवकर, शोमा आनंद और किरण जैसे एक्टर्स नजर आए. फिल्म की कहानी एक संयुक्त यानी ज्वॉइंट फैमिली की है, जिसमें एक बड़ा भाई और भाभी अपने छोटे भाई-बहन की पढ़ाई से लेकर शादी का खर्च उठाते हैं. लेकिन जेठानी से जलन के कारण वह परिवार को तोड़ने की कोशिश करती है. हालांकि इस पारिवारिक कहानी में सात फेरों के सात वचनों को भी बताया जाता है. 

80s के परिवार की कहानी

1985 में रिलीज हुई हिंदी फैमिली ड्रामा फिल्म घर द्वार को कलपतरू ने डायरेक्ट किया था. फिल्म की कहानी धनराज (श्रीराम लागू) की है, जो अपने दो छोटे भाइयों चंदर (राज किरण) और केतन (सचिन), बहन आशा और पत्नी सावित्री (तनुजा) के साथ ज्वॉइंट फैमिली में रहता है. वह अपने दोनों भाईयों को अच्छी शिक्षा देने के लिए दिन-रात मेहनत करता है. लेकिन पैसों की कमी के कारण वह केवल एक भाई चंदर को आगे पढ़ाता है क्योंकि केतन बीमारी का बहाना बनाकर अपना भविष्य त्याग देता है. वहीं चंदर इंजीनियर बन जाता है और अमीर परिवार की लड़की चंदा (शोमा आनंद) से शादी करता है. लेकिन चंदा को जेठानी सावित्री से जलन और ससुराल का सादा जीवन पसंद नहीं आता और परिवार को तोड़ने का प्लान बनाती है. 

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सात फेरों के सात वचन बताता है आशा भोसले का गाना

इसी फिल्म में चंदर और चंदा की शादी के दौरान गाना सात फेरों के सातों वचन गाना आता है, जिसे आशा भोसले ने गाया था. इस गाने के गीतकार अंजान थे. जबकि संगीत ने चित्रगुप्त का था. गाने के बोल कुछ ऐसे हैं…

सात फेरों के सातों वचन, प्यारी दुल्हनियां भूल न जाना
सात फेरों के सातों वचन, प्यारी दुल्हनियाँ भूल न जाना
प्यार का एक मंदिर है मन, मन में मूरत सजन की बसाना हो
सात फेरों के सातों वचन, प्यारी दुल्हनियां भूल न जाना 
आज मन से बंधी डोर मन की, तू हुई अब तो अपने सजन की
हो एक संजोग है ये मिलन, लाज इसकी सदा तुम निभाना
सात फेरों के सातों वचन, प्यारी दुल्हनियां भूल न जाना

सरप्राइज हिट थी घर द्वार

सात फेरों के सात वचन के अलावा घर द्वार में तितलियों से कह दो (किशोर कुमार), बाजा बजा (शब्बीर कुमार, अलका याग्निक), कोई जाए काशी (अलका याग्निक, चंद्रानी मुखर्जी, पूर्णिमा, सुरेश वाडकर), मेरी बहना (मोहम्मद अजीज, सुरेश वाडकर, मनहर), बोलूं बात पतेकी (अमित कुमार), हम ना जाइबे (अलका याग्निक), स्वर्ग से सुंदर (चंद्रानी मुखर्जी) और मेरा बाबू छैल छबीला (रूना लैला) है. इस फिल्म के गाने मेरा बाबू छैल छबीला और सात फेरों के सातों वचन गाना आज भी पॉपुलर है. जबकि 1985 में आई यह फिल्म सरप्राइज हिट साबित हुई थी. 

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