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सिर्फ एनीमिया नहीं, शरीर में आयरन की कमी दिखाती है ये 7 संकेत, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं



जब भी शरीर में कमजोरी या सुस्ती की बात आती है, तो हमारे घरों में अक्सर लोग कह देते हैं कि खून की कमी हो गई होगी या एनीमिया हो गया होगा. लेकिन बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि एनीमिया होने से काफी पहले ही शरीर में आयरन का स्तर गिरना शुरू हो जाता है. अपोलो स्पेक्ट्रा पुणे की जानी-मानी डाइटिशियन श्वेता हेमंत चिखले (एम.एससी डायटेटिक्स, सीडीई) का कहना है कि सिर्फ हीमोग्लोबिन की रिपोर्ट देखकर बेफिक्र हो जाना सही नहीं है. अगर हमारे अंदर आयरन के स्टोर्स खाली होने लगते हैं, तो शरीर बहुत पहले ही खतरे की घंटी बजाने लगता है.

अगर समय रहते इन शुरूआती संकेतों को पहचान लिया जाए, तो रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस होने वाली थकान, चिड़चिड़ापन और काम में मन न लगने जैसी परेशानियों से खुद को बचाया जा सकता है.

आयरन शरीर के लिए क्यों इतना जरूरी है?

हमारे खून में लाल रक्त कणिकाएं यानी रेड ब्लड सेल्स होती हैं. इन सेल्स के अंदर हीमोग्लोबिन नाम का एक खास प्रोटीन पाया जाता है, जिसका असली काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर सिर से लेकर पैर के अंगूठे तक पहुंचाना होता है. इस हीमोग्लोबिन को बनाने के लिए शरीर को आयरन की जरूरत पड़ती है.

जब खाने-पीने में लापरवाही या किसी अन्य वजह से शरीर को भरपूर आयरन नहीं मिलता, तो अंदर जमा हुआ आयरन धीरे-धीरे खर्च होने लगता है. जब यह भंडार पूरी तरह खत्म हो जाता है, तब जाकर डॉक्टर खून की जांच में मरीज को ‘एनीमिक’ घोषित करते हैं. लेकिन तकलीफदेह बात यह है कि बहुत से लोग हीमोग्लोबिन कम होने से हफ्तों या महीनों पहले ही भयंकर शारीरिक दिक्कतों से जूझने लगते हैं. शरीर में हो रहे इन छोटे-छोटे बदलावों को समझना और डॉक्टर को बताना बहुत जरूरी है.

आयरन की कमी के 7 बड़े संकेत, जिन्हें नजरअंदाज न करें

डाइटिशियन श्वेता चिखले के मुताबिक, अगर खून में आयरन घट रहा है तो शरीर नीचे दिए गए 7 इशारे देने लगता है:

1. रातभर सोने के बाद भी थकान और कमजोरी

अगर आप रात को 8 घंटे की गहरी नींद लेते हैं, फिर भी सुबह उठते ही बदन टूटा हुआ लगता है या दिनभर सुस्ती छाई रहती है, तो यह सीधा संकेत है कि टिशूज तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच रही है. आयरन कम होने से दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर हर वक्त थका हुआ महसूस करता है.

2. बार-बार सिरदर्द और चक्कर आना

अक्सर लोग सिरदर्द को काम का तनाव या माइग्रेन मानकर पेनकिलर खा लेते हैं. लेकिन जब दिमाग तक जाने वाली नसों को भरपूर ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो दिमाग की धमनियां सूजने लगती हैं. इससे अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाना, सिर में भारीपन और हल्का सा चक्कर महसूस होना आम बात हो जाती है.

3. जरा सी मेहनत पर सांस फूलना

अगर दो मंजिल सीढ़ियां चढ़ने, थोड़ा तेज चलने या हल्का-फुल्का घरेलू काम करने में ही आपकी सांस उखड़ने लगती है, तो यह फेफड़ों की नहीं बल्कि आयरन की कमी हो सकती है. शरीर में जब ऑक्सीजन ले जाने वाले वाहक कम होते हैं, तो फेफड़े जल्दी-जल्दी सांस खींचने की कोशिश करते हैं ताकि कमी पूरी हो सके.

4. चेहरे और आंखों का पीला पड़ना

आमतौर पर हमारी त्वचा के नीचे खून के लाल रंग की वजह से एक कुदरती चमक या गुलाबीपन दिखता है. जब आयरन गिरता है, तो त्वचा फीकी, बेजान और पीली दिखने लगती है. इसे जांचने का सबसे आसान तरीका है कि अपनी निचली पलक को नीचे खींचकर देखें. अगर अंदरूनी हिस्सा लाल या गुलाबी के बजाय सफेद या हल्का पीला दिख रहा है, तो समझ जाएं कि आयरन काफी कम हो चुका है. यही पीलापन होठों और मसूड़ों पर भी साफ झलकता है.

5. बालों का तेजी से झड़ना और नाखूनों का टूटना

बालों की जड़ों को बढ़ने के लिए भरपूर ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स की जरूरत होती है. जब शरीर में आयरन की किल्लत होती है, तो शरीर जरूरी अंगों जैसे दिल और दिमाग को बचाने के लिए सारा पोषण वहां भेज देता है और बालों व नाखूनों की सप्लाई रोक देता है. नतीजा यह होता है कि कंघी करते समय गुच्छे के गुच्छे बाल गिरते हैं और नाखून पतले होकर चम्मच के आकार में मुड़ने या चटकने लगते हैं.

6. काम में ध्यान न लगना और ब्रेन फॉग

आयरन सिर्फ खून के लिए ही नहीं, बल्कि दिमागी कामकाज और न्यूरोट्रांसमीटर्स के लिए भी बहुत अहम है. इसकी कमी होने पर याददाश्त कमजोर होने लगती है, किसी भी काम पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है और इंसान मानसिक रूप से कुंद या सुस्त महसूस करता है, जिसे मेडिकल भाषा में ब्रेन फॉग कहा जाता है.

7. बर्फ, मिट्टी या चॉक खाने की अजीब तलब (पिका)

यह एक बहुत ही अजीब लेकिन बेहद सटीक लक्षण है. आयरन की भारी कमी होने पर कई लोगों का मन कच्चा चावल, चॉक, मुल्तानी मिट्टी, दीवार का प्लास्टर या लगातार बर्फ चबाने का करने लगता है. इसे विज्ञान में ‘पिका’ डिसऑर्डर कहते हैं. अगर आपके घर में किसी बच्चे या महिला में ऐसी आदत दिखे, तो तुरंत खून की जांच कराएं.

आयरन की कमी क्यों होती है?

शरीर में यह कमी कई कारणों से पैदा हो सकती है:

  • खाने-पीने में हरी सब्जियों, दालों और सही पोषक तत्वों की कमी होना.
  • महिलाओं में पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना.
  • प्रेगनेंसी के समय, क्योंकि उस वक्त गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी मां के खून की जरूरत होती है.
  • पेट या आंतों में कोई अंदरूनी अल्सर होना, जिससे धीरे-धीरे खून रिसता रहता है.

कमी पूरी करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं?

डाइटिशियन श्वेता चिखले समझाती हैं कि गोलियां खाने से पहले अपनी रसोई को सुधारना सबसे समझदारी का काम है. प्रकृति ने हमें कई ऐसी चीजें दी हैं जो आयरन का खजाना हैं:

शाकाहारियों के लिए: रोज के खाने में मसूर, चना, मूंग और राजमा जैसी दालें शामिल करें.
हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, शेपू (सोया) और अरबी के पत्ते आयरन से भरे होते हैं.
फल और ड्राई फ्रूट्स: चुकंदर, अनार, लाल सेब, खजूर, मुनक्का और अंजीर का नियमित सेवन करें.
जादुई बीज: हलीम के बीज यानी गार्डन क्रेस सीड्स (आलिव) आयरन का सबसे बेहतरीन स्त्रोत माने जाते हैं. इन्हें दूध या पानी में भिगोकर रोजाना लिया जा सकता है.
मांसाहारी विकल्प: अंडे की जर्दी, चिकन, मटन का लिवर और मछली में हीम-आयरन होता है, जिसे शरीर बहुत तेजी से सोखता है.

विटामिन सी के बिना अधूरा है आयरन

एक बहुत जरूरी बात जो अक्सर लोग भूल जाते हैं, वह है आयरन का एब्जॉर्प्शन. आप जितना मर्जी पालक या दालें खा लें, लेकिन अगर आपके खाने में विटामिन सी नहीं है, तो शरीर उस आयरन को पचा ही नहीं पाएगा.

इसलिए जब भी आप दाल या पत्तेदार सब्जी खाएं, तो ऊपर से आधा नींबू जरूर निचोड़ें. सलाद में टमाटर और कच्चा आंवला शामिल करें. साथ ही एक बड़ी गलती से बचें – खाने के ठीक पहले या तुरंत बाद चाय और कॉफी पीने की आदत छोड़ दें. चाय में मौजूद टैनिन आयरन को बांध देता है और शरीर उसे सोख नहीं पाता.

अब वक्त आ गया है कि हम अपनी सेहत को लेकर गंभीर हों. अपने भोजन में प्रोटीन और आयरन को बराबर जगह दें ताकि खून की कमी की नौबत ही न आए. अगर बताए गए लक्षणों में से दो-तीन लक्षण भी आपको लगातार महसूस हो रहे हैं, तो देर किए बिना डॉक्टर से सलाह लें और सीरम फेरिटिन व हीमोग्लोबिन की जांच कराएं.

लेखकर के बारे में 

Dt. श्वेता हेमंत चिखले एक अनुभवी क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर (CDE) हैं, जिन्हें पोषण एवं डाइटेटिक्स के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने M.Sc. Dietetics की पढ़ाई की है और वर्षों से विभिन्न आयु वर्ग के मरीजों को वैज्ञानिक एवं व्यक्तिगत पोषण परामर्श प्रदान कर रही हैं.




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