

देश में आर्थिक गतिविधियों और परिवहन के विस्तार के साथ पेट्रोलियम उत्पादों की मांग का नया ट्रेंड सामने आया है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा फ्लैश रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में देश में पेट्रोल और डीजल की खपत में सालाना आधार पर जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि रसोई और अन्य कार्यों में उपयोग होने वाले एलपीजी (LPG) की मांग में भारी गिरावट आई है.
पेट्रोल की खपत 8 फीसदी बढ़ी, डीजल की 6.5 फीसदी
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 के मुकाबले अगस्त 2026 में देश में पेट्रोल की खपत 7.88% बढ़कर 3,824 हजार मीट्रिक टन (TMT) पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह 3,544 TMT थी.
इसी तरह अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले डीजल की खपत 6.46% की बढ़त के साथ 6,577 TMT से बढ़कर 7,001 TMT हो गई. विमान ईंधन (ATF) की मांग में भी 1.40% की मामूली तेजी दर्ज की गई और यह 720 TMT पर पहुंच गया.
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत के पीछे देश में पर्सनल मोबिलिटी, परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के मजबूत होने को वजह बताया गया है.
LPG की खपत 16 फीसदी कम हुई
इसके विपरीत, एलपीजी की खपत में चौंकाने वाली गिरावट देखने को मिली है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में एलपीजी की खपत 2,891 TMT थी, जो अगस्त 2026 में 16.15% लुढ़ककर मात्र 2,424 TMT रह गई. वित्त वर्ष 2026-27 के अब तक के संचयी आंकड़ों में भी एलपीजी की मांग में लगभग 15.89% की कमी दर्ज की गई है, जो ऊर्जा खपत के बदलते रुख को दर्शाती है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने इसके पीछे PM नरेंद्र मोदी के निर्देश पर PNG कनेक्शन को लेकर चलाए गए देशव्यापी अभियान को बताया है.




