खबर

उत्तराखंड में खतरे की घंटी! अलकनंदा बेसिन में 219 ग्लेशियर टूटने की कगार पर, क्लाइमेट चेंज से बढ़ा बड़ा जोखिम | Climate Change Puts 219 Hanging Glaciers in Uttarakhand Alaknanda Basin at Risk, Study Warns



उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में क्लाइमेट चेंज की वजह से खड़ी ढलानों पर 219 ग्लेशियर बहुत ही नाजुक हालत में टिके हुए हैं. Natural Hazards journal में अप्रैल 2026 में छपे एक शोध पत्र “Basin-scale inventory and exposure assessment of hanging glaciers, Central Himalaya” में ये खुलासा हुआ है. इस ग्लोबल स्टडी में चेतावनी दी गई है कि इस इलाके में तापमान ग्लोबल औसत से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे अचानक बर्फ के टूटने का खतरा है.

इस शोध पत्र में छपे वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक,  “तेजी से बढ़ती गर्मी और जलवायु में बदलाव के कारण हिमालय के ग्लेशियरों में अस्थिरता बढ़ रही है. इस अस्थिरता के कारण खड़ी ढलानों पर ‘हैंगिंग ग्लेशियर’ (टूटने के कगार पर) बन गए हैं, जिनसे बर्फ के टूटने और नीचे के इलाकों पर गंभीर असर पड़ने का बड़ा खतरा रहता है. हालांकि आल्प्स में इन ग्लेशियरों का बड़े पैमाने पर अध्ययन किया गया है, लेकिन हिमालय में बेसिन-स्तर पर इनका आकलन अभी भी सीमित है.” 

इस शोध पत्र में गढ़वाल हिमालय के अलकनंदा बेसिन में हैंगिंग ग्लेशियरों की एक विस्तृत लिस्ट पेश की गई है. इसमें गढ़वाल हिमालय के अलकनंदा बेसिन में GlabTop2 मॉडल का उपयोग करके कुल 219 हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान की गई है, जो 71.7 ± 3.5 km² क्षेत्र में फैले हैं और जिनका अनुमानित ice volume 2.39 ± 0.42 km³ है. इसमें 0.74 ± 0.14 km³ हेंगिंग आईस मास शामिल है. यानी इसका लगभग एक-तिहाई हिस्सा अस्थिर है.

एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में इस शोधपत्र के लेखक और IIT भुवनेश्वर में असिस्टेंट प्रोफेसर आशिम सत्तार ने कहा, ‘क्लाइमेट चेंज का हिमालय क्षेत्र के एक बड़े हिस्से पर काफी असर पड़ रहा है. हमने अपनी स्टडी में कहा है कि उत्तराखंड में 219 ‘हैंगिंग ग्लेशियर’ (लटकते हुए ग्लेशियर) बन गए हैं. यह उत्तराखंड में लटकते हुए ग्लेशियरों की पहली इन्वेंट्री में से एक है.’

जाहिर है, शोध पत्र में छपे इन नतीजों के बाद उत्तराखंड में पिघलते ग्लेशियर की निगरानी बढ़ाने और बढ़ते जोखिम को ध्यान में रखकर आपदा प्रबंधन की योजना बनाना बेहद ज़रूरी हो गया है.




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button