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किस्सा यूपी का: न मायावती, न अखिलेश.. नोएडा आने पर कुर्सी चली जाने वाला ‘मिथक’ कहां से शुरू हुआ था? | not Mayawati and Akhilesh Yadav know how Noida jinx started for up chief minister



नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ अकसर इस बात का जिक्र करते हैं कि वह नोएडा भी गए और दोबारा सत्ता में भी लौटे. इसे लेकर योगी आदित्यनाथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी तंज कसते रहे हैं कि वह अपने कार्यकाल में कभी नोएडा नहीं गए थे. उत्तर प्रदेश में नोएडा को लेकर यह टोटका नया नहीं है, लेकिन इसकी शुरुआत अखिलेश यादव, मायावती या फिर मुलायम सिंह यादव से शुरू नहीं हुई थी बल्कि इसे 38 साल हो चुके हैं. दरअसल 1988 में यूपी के सीएम वीर बहादुर सिंह थे. वह एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने नोएडा आए थे और लखनऊ लौटे तो इस्तीफा ही हो गया. यहीं से नोएडा जाने पर कुर्सी खिसक जाती है वाले टोटके की शुरुआत हुई थी.

उनके बाद यूपी के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी बने थे और कुछ दिन बाद ही वह नोएडा के दौरे पर आए थे. उन्हें भी मुख्यमंत्री का पद खोना पड़ गया था. कुछ महीने ही उनकी सरकार चल पाई थी. इस टोटके के तीसरे किरदार मुलायम सिंह यादव बने थे. 1995 में वह ऑफिशियल विजिट पर नोएडा आए थे. उनकी सरकार बसपा के समर्थन से चल रही थी और कुछ महीने बाद मायावती ने समर्थन ही वापस ले लिया. फिर मायावती मुख्यमंत्री बनीं तो उनकी भी कुर्सी नोएडा आने के बाद खिसक गई. वह 1997 में मुख्यमंत्री बनी थीं और फिर नोएडा आईं. उनकी इस विजिट के कुछ दिन बाद ही भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई. 

मायावती के लिए नोएडा की एक अलग ही अहमियत रही है क्योंकि यह उनके गृह जनपद गौतमबुद्धनगर का हिस्सा है. फिर भी उन पर यह टोटका भारी पड़ा. अब बारी कल्याण सिंह की थी. वह 1999 में मुख्यमंत्री बने थे. उनका कहना था कि मैं किसी तरह के टोटके में यकीन नहीं करता. ऐसा कहते हुए वह नोएडा आए, लेकिन कुछ समय बाद उनकी भी सत्ता चली गई और वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. इसके बाद तो यह टोटका ऐसा हुआ कि मुख्यमंत्री नोएडा आने से ही बचने लगे. जैसै राजनाथ सिंह और रामप्रकाश गुप्ता ने सीएम रहते हुए नोएडा से दूरी ही बनाकर रखी. यही नहीं मायावती की जब 2002 में सत्ता आई तो इस बार वह सावधान थीं.

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टोटके की चिंता में मायावती ने लखनऊ से ही कर दिए उद्घाटन

मायावती की आत्मकथा लिखने वाले अजय बोस ने ‘बहनजी: द राइज एंड फॉल ऑफ मायावती’ में लिखा है कि उन्होंने नोएडा एक्सप्रेसवे और गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास लखनऊ से ही कर दिया. वहीं राजनाथ सिंह ने डीएनडी का उद्घाटन नोएडा की बजाय दिल्ली जाकर किया था. फिर जब मुलायम सिंह यादव सत्ता में आए तो वह अपने पूरे कार्यकाल में नोएडा नहीं आए, जबकि उस दौरान निठारी जैसा कुख्यात कांड हो गया था. हालांकि मायावती ने 2007 में पूर्ण बहुमत की जब सरकार बनाई थी तो वह नोएडा आई थीं. उन्होंने नोएडा एक्सपो सेंटर में सतीश मिश्रा की भतीजी की शादी में हिस्सा लिया था. 

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