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Positive Parenting क्या है? जानिए हर परिवार और बच्चे के लिए क्यों जरूरी है पॉजिटिव पेरेंटिंग का ये ‘कंपास’ | positive parenting rules expert guidelines right age to start school in india



आज के समय में बच्चों की परवरिश माता-पिता के लिए बड़ी जिम्मेदारी है. हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छा व्यवहार करे, आत्मविश्वासी बने और जिंदगी में आगे बढ़े. लेकिन हर बच्चे पर एक ही तरीका काम करे, यह जरूरी नहीं है. पेरेंटिंग एक्सपर्ट रीरी त्रिवेदी ने बताया कि पॉजिटिव पेरेंटिंग एक कंपास की तरह है जो माता-पिता को बच्चे को समझने और उसके साथ बेहतर रिश्ता बनाने की दिशा दिखाता है.

पहले प्यार और फिर सुधार

पेरेंटिंग एक्सपर्ट रीरी त्रिवेदी ने बताया कि माता-पिता अक्सर बच्चे की गलतियों को तुरंत सुधारने लगते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, सुधार से पहले बच्चे को प्यार और अपनापन महसूस कराना जरूरी है. इससे बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है. बच्चा गुस्सा करे या जिद करे तो उसे डराने या लंबा भाषण देने के बजाय शांत तरीके से समझाएं. बातचीत का तरीका बच्चे के व्यवहार पर सकारात्मक असर डाल सकता है.

बच्चे को जैसा है आप वैसा करें स्वीकार

उन्होंने आगे बताया कि हर बच्चे की अपनी क्षमता और रुचि होती है. उसे हर समय किसी दूसरे बच्चे से बेहतर बनााने की कोशिश करने के बजाय उसकी खूबियों को स्वीकार करना जरूरी है. गलती होने पर तुरंत डांटने या समस्या हल करने के बजाय बच्चे को उससे सीखने का मौका दें. इससे उसका आत्मविश्वास और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित होती है.

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उम्र के हिसाब से दें आजादी

रीरी त्रिवेदी ने बताया कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार फैसले लेने और अपनी सोच विकसित करने की आजादी देनाा भी पॉजिटिव पेरेंटिंग का हिस्सा है. बच्चे सिर्फ बातों से नहीं, माता-पिता को देखकर भी सीखते हैं. इसलिए सम्मान, अनुशासन और ईमानदारी जैसे गुण बच्चों में विकसित करने के लिए माता-पिता को खुद भी इन्हें अपनाना चाहिए.

खुलकर करें बातचीत

उन्होंने बताया कि बच्चे से ईमानदारी और खुलेपन से बात करने पर वह अपनी भावनाएं और परेशानियां आसानी से साझा कर सकता है. इससे माता-पिता और बच्चे के बीच भरोसा मजबूत होता है. पॉजिटिव पेरेंटिंग का मतलब हर स्थिति में परफेक्ट होनाा नहीं है. हर परिवार और बच्चा अलग होता है, इसलिए ऐसी गाइडलाइन्स को अपनी परिस्थिति के अनुसार अपनाना बेहतर है.

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