
सावन पुत्रदा एकादशी 2026: सावन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पुत्रदा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इस साल यह पावन पर्व रविवार, 23 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से संतान सुख की कामना पूरी होती है. विशेषकर संतान प्राप्ति और संतान की लंबी आयु की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए यह एकादशी अत्यंत फलदायी मानी जाती है.
भगवान विष्णु के साथ बाल गोपाल की करें पूजा पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु, देवों के देव महादेव और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (बाल गोपाल) की उपासना की जाती है. इस पावन अवसर पर बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करना और संतान गोपाल मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना उत्तम माना गया है. इससे संतान से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
निर्जल या फलाहार व्रत रखने का विधान
व्रत का स्वरूप: श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहारी उपवास रख सकते हैं.
शुभ रंग: पूजा के दौरान पीले वस्त्र धारण करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
पूजन सामग्री: भगवान विष्णु और बाल गोपाल को तुलसी दल, पीले फल, पीले पुष्प और पंचामृत का भोग जरूर लगाएं.
संतान गोपाल मंत्र का महत्व मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी की पूजा के दौरान शुद्ध घी का दीपक जलाकर एकाग्रचित्त होकर ‘संतान गोपाल मंत्र’ का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और भगवान का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
दान-पुण्य से मिलेगा अक्षय फल एकादशी के दिन पूजा के साथ-साथ दान का भी बड़ा महत्व है:
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करें.
- तांबे की वस्तुओं या बर्तनों का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है.
- इससे घर में सुख, शांति और आर्थिक समृद्धि बनी रहती है.
श्रद्धा और आत्मसंयम का संदेश पुत्रदा एकादशी का व्रत केवल संतान प्राप्ति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सात्विक जीवन और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का भी प्रतीक है. व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए ही नियमों का पालन करना चाहिए.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


