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आगर-मालवा: 1000 साल पुराने बाबा बैजनाथ मंदिर की वो रहस्यमयी कहानियां, अंग्रेज भी रह गए थे हक्‍का-बक्‍का | agar malwa baba baijnath shahi sawari history colonel martin


मध्‍य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में 24 अगस्‍त सोमवार को बाबा बैजनाथ की शाही सवारी निकलेगी. इस शाही सवारी में बाबा के एक लाख से ज्‍यादा भक्‍त शामिल होंगे. इसके लिए शहर में खास इंतजाम किए गए हैं. शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर इंदौर-कोटा अंतरराज्यीय मार्ग पर हरियाली से ढकी पहाड़ियों के बीच बाबा बैजनाथ महादेव का 1000 साल पुराना मंदिर हैं. घंटियों की आवाज, धूप-अगरबत्ती की खुशबू, बाणगंगा की कल-कल और पहाड़ियों से आती ठंडी हवा मंदिर पहुंचने वाले भक्‍तों को छूकर गुजरती है तो ऐसा लगता है जैसे समय कुछ पल के लिए ठहर गया हो.

शिलालेख देते हैं मंदिर की प्राचीनता की गवाही 

बाबा बैजनाथ का मंदिर पूजा और आस्था की कहानी भर नहीं है, यहां का हर पत्थर इतिहास को समेटे हुए है. मंदिर का हजार साल पुराना इतिहास, इसकी स्थापना को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक मान्यताएं और मंदिर परिसर में मौजूद शिलालेख इसकी प्राचीनता की गवाही देते हैं. मंदिर के सामने सती के ओटले पर मौजूद शिलालेख में संवत 1116 का उल्लेख मिलता है. जिससे साफ है कि इस क्षेत्र में हजार साल से भी पहले आबादी और धार्मिक गतिविधियां  चल रही थीं.  

agar malwa baba baijnath temple history colonel martin.

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बाबा बैजनाथ के जीवंत अनुभव अहसास 

इतिहास के अनुसार, वर्ष 1528 में बेट बैजनाथ खेड़ा गांव में मौड़ वैश्य समाज के लोगों ने मंदिर की नींव रखी और वर्ष 1536 में इसका निर्माण पूरा हुआ. करीब 350 साल तक यह स्थान ज्वालामुखीय पत्थरों की दीवारों वाले मठ के रूप में रहा. इसके बाद आया वह दौर, जिसने इस मंदिर और बाबा बैजनाथ के जीवंत अनुभव को इतिहास के पन्‍नों में दर्ज कर दिया. जो अंग्रेजों के दौर में भारत आए कर्नल मार्टिन से जुड़ा है. 

कर्नल मार्टिन की पत्‍नी ने बाबा से की प्रार्थना  

सन 1880 की बात है, अब के उत्तर प्रदेश स्थित आगर में अंग्रेजी छावनी थी, जहां कर्नल मार्टिन तैनात थे. इसी बीच उन्‍हें युद्ध के लिए काबुल (अफगानिस्तान) जाना पड़ा. पहले दिन बीते, फ‍िर महीने लेकिन, कर्नल मार्टिन की कोई खबर नहीं आई. पति की कोई खबर नहीं आने से उनकी पत्‍नी लेडी मार्टिन चिंतित होने लगीं. कहा जाता है क‍ि इस दौरान उनसे किसी ने कहा क‍ि वे बाबा बैजनाथ के दर्शन करें. पति के परेशान लेडी मार्टिन बाबा बैजनाथ के दरबार में पहुंचीं और बाबा से प्रार्थना की. उन्‍होंने मन्नत मांगने हुए कहा- ‘अगर मेरे पति कर्नल मार्टिन सकुशल घर वापस लौट आए तो मंदिर का शिखर बनवाऊंगी.

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कर्नल मार्टिन का पत्र- ‘कोई युद्ध में मेरी मदद कर रहा था’ 

लेडी मार्टिन के बाबा बैजनाथ के दर्शन करने के कुछ दिन बाद ही कर्नल मार्टिन का पत्र आ गया. जिसमें उन्होंने एक रहस्यमयी अनुभव का जिक्र किया था. बताया जाता है क‍ि उस पत्र में कर्नल मार्टिन ने लिखा था- ‘युद्ध के बीच कोई अज्ञात व्यक्ति उनकी मदद कर रहा था, जिसके बाल बड़े-बड़े थे, हाथ में त्रिशूल था और वह बैल पर सवार था’. इस पत्र के आने के बाद लेडी मार्टिन को अहसास हुआ क‍ि यह सब बाबा बैजनाथ की कृपा है. इसके बाद कर्नल मार्टिन सकुशल घर लौटे और उनकी पत्नी की मन्नत पूरी हुई. 

मन्नत पूरी होने पूरी होने पर लेडी मार्टिन ने कराया निर्माण

मन्नत पूरी होने की खुशी में साल 1882 में लेडी मार्टिन ने निर्माण कार्य शुरू कराया. आज भी मंदिर का एक शिलालेख इस इतिहास की कहानी का गवाह है. वर्तमान में मंदिर का करीब 50 फीट ऊंचा शिखर दूर से नजर आता है. इसकी बनावट में उत्तर भारतीय और द्रविड़ियन स्थापत्य शैली की है. 
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Photo Credit: agar malwa baba baijnath temple history colonel martin in hindi

आग्नेय पाषाण से निर्मित शिवलिंग

बाबा बैजनाथ मंदिर के गर्भगृह के मध्य में आग्नेय पाषाण से निर्मित शिवलिंग स्‍थापित है. सामने विशाल सभा मंडप है, जिसके 14 द्वार चारों तरफ से खुले हैं. यहां नंदी की प्राचीन प्रतिमा है. साथ ही शिखर के बीच में ब्रह्मा-विष्णु-महेश की प्रतिमाएं और सबसे ऊपर स्वर्ण कलश स्थापित है जो मंदिर की भव्यता को और बढ़ाता है. 

बाबा बैजनाथ मंदिर के आसपास पूरा धार्मिक संसार

बाबा बैजनाथ मंदिर के आसपास गौमुख कुंड, छोटे-छोटे शिवालय, समाधियां, सप्तऋषि के नाम पर बने सात मंदिर और उसके सामने प्राचीन वराह प्रतिमा है. दक्षिण दिशा में बने मठ में मां अन्नपूर्णा का मंदिर है. बाणगंगा के दूसरी ओर पहाड़ी पर भैरवनाथ और ऊपर मंगलनाथ मंदिर है. साथ ही पास में हनुमान मंदिर और शबरी आश्रम भी है.  

जब केस लड़ने खुद अदालत पहुंचे बाबा बैजनाथ

बाबा बैजनाथ के चमत्‍कार की कहानी सिर्फ कर्नल मार्टिन तक सीमित नहीं है. इसमें नित्यानंद जी के शिष्य जय नारायण बापजी का भी नाम है जो आज भी भक्‍तों को सुनाई जाती है. कहा जाता है क‍ि पेशे से वकील जय नारायण जी बाबा बैजनाथ के बड़े भक्‍त थे. उन्‍हें केस लड़ने के लिए अदालत जाना था, लेकिन वे बाबा की साधना में लीन हो गए, उन्‍हें समय का कोई आभास ही नहीं था. इस दौरान बाबा बैजनाथ खुद अदालत पहुंचे और उनके पक्षकार की पैरवी की. कोर्ट में पक्षकार की जीत हुई, बाद में सबको पता चला क‍ि जय नारायण जी तो कोर्ट गए ही नहीं, वे साधना कर रहे थे.

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