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हत्या के आरोप में 30 साल से जेल में बंद था 105 साल का बुजुर्ग, सुप्रीम कोर्ट ने माफ की उम्रकैद की सजा | supreme court granted relief regarding the life sentence of 105-year-old murder convict



सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर एक बड़ा फैसला सुनाया है. 105 साल के हत्या के दोषी रसिक चंद्र मंडल को उनकी बची हुई उम्रकैद की सजा से मुक्त कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया है. ऐसे में 105 साल के रसिक चंद्र मंडल को अब जेल में नहीं रहना होगा. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1988 के हत्या के मामले में उन्हें जमानत देने वाले अपने पहले के आदेश को पक्का कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है रसिक चंद्र मंडल की ज्यादा उम्र और स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए अब यह केस बंद किया जा रहा है. 

1994 में हुई थी 68 साल की सजा 

दरअसल, पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1920 में जन्मे मंडल को 1994 में 68 साल की उम्र में हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. तब से वे लगातार जेल की सजा काट रहे थे. साल 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. साल 2020 में जब रसिक चंद्र मंडल की उम्र 99 साल हो गई तो बढ़ती उम्र और शारीरिक बीमारियों का हवाला देते हुए उन्होंने रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जहां 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत दी थी. जिसके बाद वह जेल से बाहर आ गए थे. अब सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में दिए गए उनके अंतरिम जमानत के आदेश को स्थाई कर दिया है, जिसके चलते उन्हें फिर से जेल नहीं जाना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की उम्र को देखते हुए, वे मामले को बंद कर रहे हैं और मामले में बची हुई सज को माफ कर रहे हैं. CJI ने कहा कि भले ही उम्रकैद की सजा पूरी न हुई हो, उन्हें वापस हिरासत में नहीं लिया जाएगा. अदालत ने गौर किया था कि मंडल को उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं थीं, ऐसे में उन्हें जेल में नहीं रखा जा सकता. 

रसिक चंद्र मंडल ने की थी भाई की हत्या 

दरअसल, रसिक चंद्र मंडल ने 1988 में पारिवारिक विवाद के मामले में अपने भाई सुरेश मंडल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मृतक की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने रसिक समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था, जहां साल 1994 में कोर्ट ने 68 साल की उम्र में उन्हें इस घटना में दोषी पाया था, जिसके बाद रसिक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

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