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भाई के अंधे प्यार की वजह से अनपढ़ रह गयी बहन, ससुराल में मिला तिरस्कार, लता मंगेशकर का गाना 64 साल बाद भी यादगार | this 64 year old lata mangeshkar song sister remained uneducated because of brothers love got insulted at in laws house became cult



हिंदी सिनेमा में कई फिल्में ऐसी रही हैं, जिन्होंने समाज की बड़ी सच्चाई को पर्दे पर उतारा. 1962 में आई फिल्म ‘अनपढ़’ भी ऐसी ही कहानी थी. फिल्म में पढ़ाई से दूर रह गई एक लड़की की जिंदगी दिखाई गई थी. परिवार का प्यार उसे शिक्षा नहीं दे पाया. शादी के बाद उसे इसी कमी के कारण ससुराल में ताने और तिरस्कार सहने पड़े. फिल्म में माला सिन्हा ने लाजवंती का किरदार निभाया था. धर्मेंद्र, बलराज साहनी और शशिकला भी अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म की कहानी के साथ इसके गाने भी खूब पसंद किए गए. इनमें लता मंगेशकर का गाया ‘रंग बिरंगी राखी लेके’ आज भी भाई-बहन के रिश्ते की याद दिलाता है.

भाई के प्यार ने बहन को पढ़ने से रखा दूर

‘अनपढ़’ की कहानी लाजवंती के इर्द-गिर्द घूमती है. बचपन में उसके भाई का अपनी बहन के लिए बेहद प्यार था. इसी प्यार में वह उसकी पढ़ाई को जरूरी नहीं समझता. लाजवंती पढ़-लिख नहीं पाती. बाद में उसकी शादी एक अच्छे परिवार में होती है. लेकिन ससुराल पहुंचने के बाद उसकी अनपढ़ता उसके लिए परेशानी बन जाती है. उसे बात-बात पर ताने सुनने पड़ते हैं. फिल्म ने दिखाया कि लड़की की शिक्षा सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए जरूरी है.

लता की आवाज में गूंजा भाई-बहन का प्यार

फिल्म का गाना ‘रंग बिरंगी राखी लेके’ आज भी बेहद खास माना जाता है. इसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी. इस गाने को मदन मोहन ने संगीत दिया था. इसके बोल राजा मेहदी अली खान ने लिखे थे. गाने में भाई-बहन के रिश्ते की मासूमियत और प्यार को खूबसूरती से दिखाया गया. माला सिन्हा और बलराज साहनी पर फिल्माया गया यह गाना रक्षाबंधन के मौके पर आज भी याद किया जाता है.

64 साल बाद भी याद की जाती है ‘अनपढ़’

‘अनपढ़’ का निर्देशन मोहन कुमार ने किया था. फिल्म में माला सिन्हा के साथ धर्मेंद्र, बलराज साहनी और शशिकला जैसे कलाकार नजर आए. फिल्म 1962 में रिलीज हुई थी और उस दौर में इसे दर्शकों ने काफी पसंद किया. यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में सातवें स्थान पर रही थी. फिल्म का एक और गाना ‘आपकी नजरों ने समझा’ भी आज तक लोगों की पसंद बना हुआ है. मदन मोहन का संगीत और लता मंगेशकर की आवाज ने ‘अनपढ़’ को यादगार बना दिया.

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