

पढ़ाई में मन न लगना, फोकस न कर पाना, किताबों से मन उचट जाना किसी भी पढ़ने वाले बच्चे की आम समस्या है. कभी मोबाइल उन्हें किताब से ज्यादा अच्छा लगता है, कभी दोस्तों के साथ समय बिताना और कभी पढ़ाई का थोड़ा सा दबाव भी उन्हें बहुत ज्यादा लगने लगता है. ऐसे में माता-पिता अक्सर बच्चों को डांटते हैं, समझाते हैं और कई बार उनके सामने अपने संघर्षों की मिसाल भी रखते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो शायद वही बात कुछ अलग तरीके से समझाता है. खेत में काम कर रहा एक मजदूर कैमरे के सामने अपनी जिंदगी की कहानी बताते हुए बच्चों और विद्यार्थियों से कहता है कि अगर उन्हें दिन में कुछ घंटे पढ़ना मुश्किल लगता है तो एक बार उसकी जिंदगी देख लें. उसकी बातों में कोई बड़ा भाषण नहीं है, बल्कि अपनी ही एक गलती का अफसोस है.
पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लिया, आज खेत में मेहनत कर रहा हूं
वीडियो में यह व्यक्ति बताता है कि जब उसके पास पढ़ने का मौका था, तब उसने पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लिया. उस समय उसने अपना वक्त दूसरी चीजों में गंवा दिया. आज हालात ऐसे हैं कि उसे खेत में दिनभर कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और 12 घंटे काम करने के बाद भी उसकी कमाई करीब 400 रुपये रोजाना ही हो पाती है. वह अपनी जिंदगी को किसी दूसरे के लिए शिकायत की तरह नहीं रखता, बल्कि अपनी गलती की तरह देखता है. उसका संदेश सीधा है कि जब पढ़ने का मौका मिले तो उसे गंवाना नहीं चाहिए. क्योंकि जिस काम को आज कुछ घंटों तक बैठकर करना मुश्किल लगता है, जिंदगी में बाद में हालात उससे कहीं ज्यादा मेहनत मांग सकते हैं.
बच्चों को डराकर नहीं, समझाकर पढ़ाई की अहमियत बताएं
माता-पिता के लिए इस वीडियो में एक जरूरी बात छिपी है. बच्चे जब पढ़ाई से बचते हैं तो उन्हें बार-बार यह कहना आसान है कि “नहीं पढ़ोगे तो कुछ नहीं कर पाओगे”. लेकिन ऐसी बातें कई बार बच्चों पर उतना असर नहीं करतीं. इसके बजाय उन्हें यह समझाना ज्यादा जरूरी है कि पढ़ाई सिर्फ परीक्षा में नंबर लाने के लिए नहीं है. यह उनके सामने आगे चलकर ज्यादा विकल्प खोलने का एक मौका भी है.
बच्चे को यह समझाना चाहिए कि हर किसी की मेहनत सम्मान के लायक है. खेत में काम करना हो, दुकान चलानी हो या किसी दफ्तर में नौकरी करना, हर काम में मेहनत लगती है. फर्क सिर्फ इतना है कि आज पढ़ाई के लिए मिला समय भविष्य में उसके पास मौजूद विकल्पों को बढ़ा सकता है. बच्चों को पढ़ाई के लिए मजबूर करने से ज्यादा जरूरी है उन्हें इसकी अहमियत समझाना. शायद इस मजदूर की कहानी उन्हें वह बात समझा सके, जो घंटों की नसीहत भी नहीं समझा पाती.
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