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टाटा ट्रस्ट , टाटा संस और टाटा ग्रुप… तीनों में क्या है फर्क? किसके हाथ में है 31 लाख करोड़ का साम्राज्य | What is the difference between Tata Trusts Tata Sons Tata Group Explained


नई दिल्ली:

टाटा संस कुछ दिन से चर्चा में बना हुआ है. पिछले हफ्ते टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, वह फरवरी 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे. इसी बीच मंगलवार को टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) होनी थी, लेकिन इसे टाल दिया गया. इतिहास में यह पहली बार है जब टाटा संस की AGM को टालना पड़ा. 

टाला क्यों? क्योंकि कोरम की कमी थी. कोरम, सदस्यों की वह कम से कम संख्या होती है, जिनके होने पर ही बैठक में फैसले लिए जा सकते हैं. 

ये बैठक ऐसे समय होने वाली थी, जब एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद उनके उत्तराधिकारी को चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने खोजबीन शुरू कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के तौर पर नोएल टाटा की टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन में अहम भूमिका होगी. हालांकि, आखिरी फैसला टाटा संस ही लेगा. 

अब जब इतनी चर्चा हो रही है तो ये जानना भी जरूरी है कि टाटा संस, टाटा ट्रस्ट और टाटा ग्रुप में क्या फर्क है? ऐसे देखने में तो ये सभी एक ही साम्राज्य का हिस्सा लगते हैं लेकिन इनका ढांचा, काम करने का तरीका और मालिकाना हक एक-दूसरे से काफी अलग हैं.

तीनों में क्या है फर्क?

टाटा ट्रस्ट क्या है?

कई सारे ट्रस्टों का एक ग्रुप है- टाटा ट्रस्ट. इसके दो प्रमुख ट्रस्ट हैं- सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT). 

टाटा ट्रस्ट की नींव जमशेदजी टाटा ने रखी थी. टाटा संस में टाटा ट्रस्ट की 66% हिस्सेदारी है. इसमें 52% हिस्सेदारी SRTT और SDTT की है और बाकी की 14% की हिस्सेदारी बाकी दूसरे ट्रस्टों की है.

टाटा के साम्राज्य में टाटा ट्रस्ट ही सबकुछ है. टाटा ट्रस्ट चैरिटेबल ट्रस्ट है. यह देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे सामाजिक कामों के लिए यह ट्रस्ट पैसा देता है. रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा इसके चेयरमैन हैं.

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टाटा संस क्या है?

साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने टाटा ग्रुप की शुरुआत की थी. साल 1904 में उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद उनके बेटों- सर रतन और सर दोराबजी और चचेरे भाई आरडी टाटा ने टाटा कंपनियों को मर्ज कर टाटा संस बनाया.

टाटा संस ही टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है. यह टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों जैसे TCS, टाटा मोटर्स में निवेश करती है और प्रमोटर की भूमिका निभाती है. 

टाटा ग्रुप की कंपनियों में टाटा संस की 25% से लेकर 73% तक हिस्सेदारी है. सबसे कम 25% टाइटन में और सबसे ज्यादा 73% हिस्सेदारी टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन में है. TCS में टाटा संस की हिस्सेदारी 71.9% है. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ही हैं.

मुंबई में टाटा ग्रुप का हेड ऑफिस बॉम्बे हाउस.

मुंबई में टाटा ग्रुप का हेड ऑफिस ‘बॉम्बे हाउस’.
Photo Credit: AFP

टाटा ग्रुप क्या है?

टाटा के बारे में कहा जाता है कि वह सुई से लेकर हवाई जहाज तक बनाता है. टाटा की एक नहीं, बल्कि सैकड़ों कंपनियां हैं और इन्हीं कंपनियों का जो ग्रुप है, वह है- टाटा ग्रुप.

टाटा ग्रुप की 100 से ज्यादा कंपनियां हैं. इनमें से 26 कंपनियां शेयर मार्केट में लिस्टेड है. 2024-25 में टाटा ग्रुप की कंपनियों का रेवेन्यू 180 अरब डॉलर रहा था. 31 मार्च 2025 तक टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप 328 अरब डॉलर थी. भारतीय करंसी में यह रकम लगभग 31.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.

टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों के अपने-अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और सीईओ हैं. इन कंपनियों में 10 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं.

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