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दिमागी नक्सल, संसद में हंगामे से लेकर वंदे मातरम् विवाद तक… किरेन रिजिजू ने NDTV को क्या कुछ बताया? पढ़ें | Kiren Rijiju Responds To Opposition Criticism On Monsoon Session And Vande Mataram Controversy



नई दिल्ली:

संसद के मानसून सत्र के हंगामे की भेंट चढ़ने के बाद देश की सियासत गरमाई हुई है. एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से लाल किले से दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले भाषण से लेकर संसद में हुए हंगामे, महिला आरक्षण बिल और कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर हुए विवाद को लेकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

NDTV को दिए इंटरव्यू में किरेन रिजिजू ने हर मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि सरकार किसी के दबाव में झुकने वाली नहीं है और जनहित से जुड़े फैसले हर हाल में लागू होकर रहेंगे.

‘दिमागी नक्सल’ पर क्यों बौखलाया विपक्ष?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर विपक्ष के ऐतराज को रिजिजू ने पूरी तरह बेबुनियाद बताया. उन्होंने साफ किया कि पीएम मोदी ने पूरे संदर्भ के साथ बात कही थी. देश में बंदूक उठाने वाले माओवाद और नक्सलवाद को तो सरकार ने खत्म कर दिया है, लेकिन अब शहरों में बैठे ‘दिमागी नक्सल’ से निपटना बाकी है.

रिजिजू ने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई पूछे कि चोरी किसने की और कोई खुद उठकर खड़ा हो जाए, तो इसमें किसी और की गलती नहीं है. पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के खुद को जोड़ने वाले बयान पर उन्होंने कहा कि चिदंबरम जब गृह मंत्री थे, तब नक्सली उन पर हमले करते थे और उन्हें चिढ़ाते थे. ऐसे में उन्हें तो पीएम मोदी के इस बयान की तारीफ करनी चाहिए थी. 

रिजिजू के मुताबिक, असली अर्बन या दिमागी नक्सल वे हैं जो कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करते हैं, नॉर्थ-ईस्ट को काटने का सपना देखते हैं या हमारे जवानों की शहादत पर जश्न मनाते हैं.

‘वंदे मातरम’ विवाद पर कांग्रेस पर बड़ा हमला

कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ को लेकर उठे विवाद पर संसदीय कार्य मंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि वीडियो देखकर साफ हो जाता है कि आखिर वहां क्या हुआ था. देश की वंदना और भारत माता की पूजा पर आपत्ति जताना अफसोसजनक है. 

उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि कभी देश पर 50 साल से ज्यादा राज करने वाली और कद्दावर नेताओं वाली इतनी पुरानी पार्टी आज किन लोगों के हाथों में चली गई है, यह देखकर खराब लगता है.

महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन पर राहुल गांधी से बातचीत का खुलासा

महिला आरक्षण बिल और डीलिमिटेशन (परिसीमन) को लेकर किरेन रिजिजू ने बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक बात की थी. उनके साथ प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई भी मौजूद थे.

रिजिजू ने बताया कि उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते राहुल गांधी से हाथ जोड़कर देशहित में विचार करने का अनुरोध किया था. राहुल गांधी ने सोचने के लिए एक रात का समय मांगा, लेकिन अगले दिन फोन पर साफ कह दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर सरकार से बात नहीं करेगी.

दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए रिजिजू ने साफ किया कि किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होगा. 

वर्तमान सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत का इजाफा किया जाएगा. यानी अगर किसी राज्य में 100 सीटें हैं तो 150 होंगी. इसके बावजूद उत्तर और दक्षिण भारत के नाम पर देश को बांटने की राजनीति की जा रही है. 

उन्होंने साफ किया कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ही साफ लिखा था कि इसका क्रियान्वयन 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर होगा.

रिजिजू ने बताया कि अप्रैल में भले ही सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं था, लेकिन अब टीएमसी, एनसीपी (शरद पवार) और एसपी जैसे दलों ने अंदरखाने संकेत दिया है कि वे महिला आरक्षण के समर्थन में हैं. ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएगी. उन्होंने भरोसा जताया कि पीएम मोदी जो वादा करते हैं, उसे पूरा करते हैं और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाकर ही रहेंगे.

छात्रों पर कार्रवाई का क्या था सच?

दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस की तरफ से पैलेट गन और बल प्रयोग के आरोपों को रिजिजू ने मनगढ़ंत और अफवाह बताया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में असल छात्र कम और आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, भीम आर्मी, आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI) के कार्यकर्ता ज्यादा थे. पुलिस ने केवल उस वक्त रोका जब हजारों की भीड़ जबरदस्ती संसद में घुसने की कोशिश कर रही थी.

उन्होंने दिल्ली पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि बिना कोई गोली चलाए और बिना किसी की जान लिए इतने बड़े प्रदर्शन को संभाला गया.

विपक्ष के सदन न चलने देने के रवैये पर दुख जताते हुए रिजिजू ने कहा कि अपने 20 साल के संसदीय अनुभव में उन्होंने ऐसा विपक्ष कभी नहीं देखा जो खुद चर्चा से भागता हो. सरकार हर मुद्दे पर जवाब देने को तैयार थी, लेकिन विपक्ष सुनने को ही तैयार नहीं था. संसद के बाहर मकर द्वार पर वेशभूषा बदलकर नाटक करने और पपेट लेकर नारेबाजी करने को उन्होंने बचकाना हरकत बताया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सांसदों को ऐसा बना दिया है कि वे बोलना और बहस करना भूल चुके हैं और सिर्फ हंगामा करने को ही अपना काम मान बैठे हैं.

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