

उत्तराखंड के नैनीताल के पास मुक्तेश्वर क्षेत्र में स्थित लगभग 1200 से 1300 साल पुराना कपिलेश्वर महादेव मंदिर कत्यूरी काल की उत्कृष्ट शिल्पकला का एक झुका हुआ और रहस्यमयी प्राचीन शिव मंदिर है, जिसका मुख्य भवन एक तरफ थोड़ा झुका हुआ है. मान्यता है कि इस मंदिर में महर्षि कपिल ने तपस्या की थी. मंदिर दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता को लेकर एक वीडियो शेयर किया है. इसके साथ ही उन्होंने मंदिर का पौराणिक महत्व भी बताया है.
कपिलेश्वर महादेव मंदिर
मुख्यमंत्री ने एक्स पर मंदिर का वीडियो शेयर किया है. वीडियो पोस्ट करने के साथ-साथ उन्होंने लिखा, “अल्मोड़ा शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर सिमल्टी गांव के पास कपिलेश्वर शिव मंदिर उत्तराखंड के पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है. कत्यूरी काल में बना यह मंदिर अपनी खास आर्किटेक्चरल स्टाइल और आध्यात्मिक माहौल के लिए खास पहचान रखता है. सावन के पवित्र महीने में यहां खास पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जिससे मंदिर का माहौल और भी भक्तिमय हो जाता है. अल्मोड़ा जिले में आने पर शिव के इस धाम के दर्शन जरूर करें”.
मंदिर की मान्यता
ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु के अवतार महर्षि कपिल मुनि ने कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए थे. मंदिर का निर्माण लगभग 9वीं शताब्दी में कत्यूरी वंश के शासनकाल के दौरान हुआ माना जाता है. मंदिर के गर्भगृह में प्राकृतिक रूप से प्रकट स्वयंभू शिवलिंग स्थित है.
अल्मोड़ा शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर सिमल्टी गांव के पास स्थित कपिलेश्वर शिव मंदिर उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। कत्यूरी शासनकाल में निर्मित यह मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला और आध्यात्मिक आभा के लिए विशेष पहचान रखता है।
पवित्र सावन मास में यहां विशेष… pic.twitter.com/pp0O2Ndmeb
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 13, 2026
एक तरफ झुका है ये शिव मंदिर
मंदिर का ढांचा थोड़ा एक तरफ झुका हुआ है, जिसके पीछे भूवैज्ञानिक और स्थानीय नागों के युद्ध से जुड़ी दिलचस्प लोक कथाएं जुड़ी हुई हैं. पिथौरागढ़ का कपिलेश्वर मंदिर गुफा के भीतर स्थित है और वहां से हिमालय की सुंदर चोटियों के दर्शन होते हैं. वहीं, अल्मोड़ा का मंदिर शकुनी और फड़का नदी के संगम के पास शांत वातावरण में बसा है. सावन मास और महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
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