धर्म

Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा का आखिरी पड़ाव शुरू, रक्षाबंधन पर गुफा पहुंचेगी ‘छड़ी मुबारक’


Amarnath Yatra 2026: श्रीनगर के मशहूर श्री शंकराचार्य मंदिर में पवित्र छड़ी मुबारक से जुड़ी पूजा और दूसरी धार्मिक रस्में पूरी होने के साथ ही सालाना अमरनाथ यात्रा-2026 का आखिरी चरण शुरू हो गया है.13 अगस्त को देवी को नमन करने के लिए छड़ी मुबारक को श्रीनगर के हरि पर्वत पर स्थित ‘शारिका-भवानी’ मंदिर ले जाया जाएगा.

इसके बाद, अगले एक हफ़्ते तक छड़ी मुबारक को श्रीनगर के अलग-अलग मंदिरों में ले जाया जाएगा. फिर 22 अगस्त को यह आखिरी दर्शन के लिए पहलगाम के लिए रवाना होगी और 29 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन पवित्र गुफा पहुँचेगी, जिसके साथ ही यात्रा का समापन होगा.

हरियाली अमावस्या पर वैदिक मंत्रों के बीच हुई रस्में

आज मंत्रों के जाप के बीच पूरी श्रद्धा और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पवित्र रस्में निभाई गईं, जो भक्तों के लिए एक अहम आध्यात्मिक मौका था. पुरानी परंपराओं के अनुसार, ‘हरियाली-अमावस्या’ (श्रावण अमावस्या) के मौके पर पूजा-अर्चना के लिए महंत दीपेंद्र गिरी की अगुवाई में स्वामी अमरनाथ जी की छड़ी मुबारक को आज गोपाद्रि पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर ले जाया गया.

शंख की ध्वनि से पूरा माहौल गूंज उठा. वैदिक मंत्रों के जाप के साथ पूजा की गई और पवित्र छड़ी के साथ आए साधुओं ने भी लगभग नब्बे मिनट तक चली प्रार्थना में हिस्सा लिया. इस दौरान जम्मू-कश्मीर और पूरे देश की शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना भी की गई.

आदि गुरु शंकराचार्य से नाता

पहाड़ी की चोटी पर एक सुंदर इमारत बनी हुई है. इस पहाड़ी को पहले जेठा लरक कहा जाता था और बाद में इसका नाम गोपाद्रि पहाड़ी रखा गया. महंत जी ने बताया कि इतिहासकारों का मानना है कि चोटी पर स्थित यह मंदिर मूल रूप से राजा संदिमान (2629-2564 ईसा पूर्व) ने बनवाया था. महंत जी ने आगे कहा कि इस मंदिर को पहले ज्येष्ठेश्वर या ज्योतिश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता था. लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य जी के इस मंदिर में आने के बाद, अब इसे श्री शंकराचार्य मंदिर के नाम से जाना जाता है.

4.81 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे बाबा बर्फानी के दरबार

तीर्थयात्रियों के लिए बालटाल से अमरनाथ यात्रा 9 अगस्त को रोक दी गई थी, वहीं खराब मौसम और रास्ते को हुए नुकसान के कारण पहलगाम की तरफ से यात्रा 25 जुलाई से ही बंद है. 3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिनों की यात्रा में अब तक 4 लाख 81 हज़ार से ज़्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं.

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