

All India Quota and State Counseling : NEET UG में अच्छी रैंक हासिल करने के बाद अगली बड़ी चुनौती सही कॉलेज और सीट हासिल करना होती है. इस बीच मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET UG काउंसलिंग 2026 के राउंड 1 के लिए चॉइस-फिलिंग विंडो शुरू कर दी है. यह ऑल इंडिया कोटा के तहत अंडरग्रेजुएट मेडिकल या डेंटल कोर्स में एडमिशन के प्रोसेस का एक अहम चरण है. हालांकि, उससे पहले छात्रों को ऑल इंडिया कोटा और स्टेट काउंसलिंग के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है. दोनों काउंसलिंग में NEET UG स्कोर अहम होता है, लेकिन इनके नियम, सीटों का दायरा, आरक्षण और आवेदन प्रक्रिया अलग हो सकती है. ऐसे में छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि किस काउंसलिंग में कितनी सीटें आती हैं और दोनों के लिए आवेदन कैसे किया जाता है.
ऑल इंडिया कोटा में कितनी सीटें होती हैं?
एमसीसी देशभर में सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की 15% ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए यूजी काउंसलिंग करता है. इसके अलावा एमसीसी AIIMS की 100% MBBS सीटों, JIPMER, BHU, AMU और कुछ दूसरे केंद्रीय संस्थानों की संबंधित सीटों के लिए भी काउंसलिंग करता है. ऑल इंडिया कोटा में देशभर के पात्र NEET UG उम्मीदवार भाग ले सकते हैं. इसका मतलब है कि छात्र अपने राज्य के बाहर भी उपलब्ध इंडिया कोटा सीटों के लिए आवेदन कर सकते हैं.
बाकी 85% सीटों का क्या होता है?
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बाकी 85% राज्य कोटे की सीटों के लिए संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अपनी काउंसलिंग करता है. इसमें राज्य के सरकारी और पात्र प्राइवेट मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की सीटें शामिल हो सकती हैं. स्टेट काउंसलिंग में संबंधित राज्य की पात्रता, आरक्षण और मेरिट से जुड़े नियम लागू होते हैं. इसलिए हर राज्य की प्रक्रिया और शेड्यूल अलग हो सकता है.
ऑल इंडिया कोटा और स्टेट काउंसलिंग में मुख्य अंतर
कौन कराता है: ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग एमसीसी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के तहत कराती है, जबकि स्टेट काउंसलिंग संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की काउंसलिंग अथॉरिटी करती है.
सीटों का दायरा: ऑल इंडिया कोटा में सरकारी कॉलेजों की 15% सीटें और एमसीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले संस्थानों की संबंधित सीटें शामिल होती हैं. स्टेट काउंसलिंग मुख्य रूप से राज्य कोटे की सीटों के लिए होती है.
पात्रता: दोनों में NEET UG क्वालिफाई करना जरूरी है. स्टेट काउंसलिंग में राज्य के अपने पात्रता और निवास प्रमाण पत्र (Domicile) (जहां लागू हो) संबंधी नियम भी अहम हो सकते हैं.
आरक्षण: ऑल इंडिया कोटा में केंद्र के लागू आरक्षण नियमों के अनुसार सीटें आवंटित होती हैं, जबकि स्टेट काउंसलिंग में संबंधित राज्य की आरक्षण नीति लागू होती है.
रजिस्ट्रेशन: ऑल इंडिया कोटा के लिए एमसीसी के पोर्टल पर आवेदन करना होता है, जबकि स्टेट काउंसलिंग के लिए संबंधित राज्य के ऑफिशियल पोर्टल पर अलग से रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है.
क्या दोनों काउंसलिंग में कर सकते हैं आवेदन?
योग्य उम्मीदवार ऑल इंडिया कोटा और स्टेट काउंसलिंग दोनों में आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, दोनों की रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अलग होती है और उम्मीदवारों को संबंधित पोर्टल पर अलग-अलग आवेदन करना होता है. इसलिए NEET UG उम्मीदवारों को केवल एक काउंसलिंग पर निर्भर रहने के बजाय अपनी पात्रता और पसंद के अनुसार दोनों ऑप्शंस पर नजर रखनी चाहिए. सबसे जरूरी है कि रजिस्ट्रेशन, चॉइस फिलिंग और डॉक्यूमेंट संबंधी तारीखों को ऑफिशियल वेबसाइट पर समय-समय पर जरूर चेक करें.
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