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त्योहारी सीजन में महंगी होती चीनी, सरकार क्या कदम उठा रही? | Sugar prices rising during the festive season What steps is the government taking



आने वाले त्योहारी सीजन से पहले देश के कई हिस्सों में चीनी महंगी होने लगी है. इसको देखते हुए उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने देश में चीनी की डिमांड, उपलब्धता और बाज़ार में चीनी की सप्लाई की सख्ती से मॉनिटरिंग करना शुरू कर दिया है.

रविवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चीनी सेक्टर में डिमांड-सप्लाई की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की. बैठक में खाद्य विभाग के सचिव समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. बैठक के बाद प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया X पर एक ट्वीट कर कहा- @fooddeptgoi के सेक्रेटरी और सीनियर अधिकारियों के साथ एक रिव्यू मीटिंग की, जिसमें चीनी के मौजूदा स्टॉक, प्रोडक्शन लेवल और चल रहे चीनी सीज़न की ज़रूरतों का जायज़ा लिया गया. चीनी की उपलब्धता पर कड़ी नज़र रखने और पूरे सीज़न के दौरान पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने व सप्लाई को स्थिर रखने के लिए समय पर ज़रूरी कदम उठाने पर ज़ोर दिया गया”.

दरअसल पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान चीनी की कीमतें बढ़ने लगी हैं. पिछले एक महीने के दौरान, देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 7% बढ़ी है.

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक, 08 अगस्त को देश में चीनी की औसत कीमत 50.42/किलो थी. कुछ राज्यों में चीनी ज़्यादा महंगी हुई है.

एक महीने में चीनी की कीमत में बढ़ोतरी (%)
(08 जुलाई से 08 अगस्त, 2026)

ओडिशा 15.75%
महाराष्ट्र 12.75%
उत्तराखंड 12.50%
कर्नाटक 11.62%
छत्तीसगढ़ 10.11%

इसे देखते हुए भारत सरकार ने जमाखोरी पर रोक लगाने, सट्टा व्यापार को हतोत्साहित करने और उचित कीमतों पर चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 1 अगस्त, 2026 से ही पूरे देश में चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा लागू कर दी है. ये फैसला 30 नवंबर, 2026 तक लागू रहेगा.

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, इस आदेश का मुख्य उद्देश्य बाजार में चीनी की सप्लाई ज़रूरत के मुताबिक बनाए रखना है. सरकार की कोशिश यह सुनिश्चित करना भी है कि वास्तविक व्यापार और वितरण गतिविधियां बिना किसी अड़चन के जारी रहें.

उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के एक रिलीज़ के मुताबिक, “सरकार ने पाया है कि चीनी के एक्स-मिल मूल्य में हालिया वृद्धि मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति के अनुरूप नहीं है. यह भी जानकारी में आया है कि कुछ व्यापारियों, डीलरों और बाजार मध्यस्थों द्वारा की गई जमाखोरी, सट्टा लेनदेन और चीनी की वास्तविक भौतिक आवाजाही के बिना मिलों से केवल कागजी व्यापार ने बाजार में कृत्रिम कमी की धारणा बनाने में योगदान दिया है. ऐसी गतिविधियों के परिणामस्वरूप अनावश्यक मूल्य अस्थिरता उत्पन्न हुई है और एक्स-मिल तथा खुदरा दोनों स्तरों पर चीनी की कीमतों में वृद्धि हुई है”.

सरकार का आंकलन है कि देश में घरेलू खपत की आवश्यकताओं के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है.




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