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38 साल पुराना आमिर- जूही का हिट गाना है ब्रिटिश सॉन्ग की कॉपी, उदित- अलका की आवाज में बना कल्ट, सुनकर कहेंगे- प्यार और भरोसे का प्रतीक | Aamir khan Juhi Chawla 38 year old romantic song copy of a British sung by Udit Narayan and Alka Yagnik



नई दिल्ली:

सिनेमा का दुनियाभर में अलग ही क्रेज है. फिल्में और गाने दुनियाभर में देखे सुने जाते हैं. फिल्मों के माध्यम से दुनिया भर के अलग अलग कल्चर को देखने – सुनने का मौका मिलता है.  हिंदी सिनेमा की कई फिल्मों की कहानी और गाने हॉलीवुड से प्रेरित होती हैं और ये ऑरिजनल से भी ज्यादा हिट हो जाती हैं.  आज हम ऐसे ही एक हिट गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कम ही लोगों को पता होगा कि इस गाने को एक विदेशी गाने से कॉपी किया गया था. यह गाना आमिर खान और जूही चावला पर फिल्माया गया था.  यह गाना उस दौर में काफी हिट हुआ था और लोग आज भी गुनगुनाते हैं.

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हम जिस गाने की बात कर रहे हैं उसके बोल हैं, “अकेले हैं तो क्या गम है”. यह 1988 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ⁠Qayamat Se Qayamat Tak का बेहद लोकप्रिय रोमांटिक गाना है. इसे उदित नारायण और अलका याग्निक ने गाया है, संगीत आनंद-मिलंद ने दिया है और बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे हैं. इस गाने में आमिर खान और जूही चावला नजर आए थे. यह गाना प्यार और भरोसे का प्रतीक है.  इसके बोल यह सिखाते हैं कि अगर जीवन में किसी अपने का साथ हो, तो किसी भी मुश्किल या तूफान का सामना किया जा सकता है. फिल्म Qayamat Se Qayamat Tak के साथ-साथ इसका संगीत भी  सफल हुआ था.  

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हालांकि कम ही लोगों को पता होगा कि यह बेहद रोमांटिक गाना 1958 में शुरू हुए ब्रिटिश इंस्ट्रूमेंटल रॉक बैंड  The Shadows के 1977 में आए गिटार ट्रैक “Return to the Alamo” की धुन से प्रेरित माना जाता है.   रिफ्स से लेकर लीड तक, इसमें इतनी जबरदस्त समानता है कि जिसे संगीत की समझ न हो, वह भी तुरंत पहचान लेगा.   

फिल्म के बारे में

कयामत से कयामत तक 1988 में रिलीज हुई थी. इसका निर्देशन मंसूर खान ने किया था और नासिर हुसैन ने इसे लिखा और निर्मित किया था. फिल्म में आमिर खान और जूही चावला लीड रोल में थे. फिल्म का संगीत आनंद-मिलिंद ने दिया है और गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे हैं. कयामत से कयामत तक दो लोगों की कहानी है, उनके प्रेम में पड़ने, भाग जाने और उसके बाद की घटनाओं के बारे में. इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है और यह सफल फिल्मों में से एक है.

25 मिलियन के बजट में बनी यह फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल रही और इसने 50 मिलियन की कमाई की , जिससे यह उस वर्ष की तीसरी सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई. फिल्म को समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. फिल्म का संगीत भी उतना ही सफल रहा और 1980 के दशक के सबसे अधिक बिकने वाले हिंदी संगीत  एल्बमों में से एक बन गया, जिसकी 8 मिलियन से अधिक प्रतियां बिकीं. यह आनंद-मिलिंद  और टी-सीरीज  के करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. फिल्म के संगीत ने उदित नारायण और अलका याग्निक के करियर को बुलंदियों पर पहुंचा दिया.   

36वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘कयामत से कयामत तक’ को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार मिला. 34वें फिल्मफेयर पुरस्कारों में  फिल्म को ग्यारह नामांकन प्राप्त हुए और इसने सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सहित आठ प्रमुख पुरस्कार जीते . वहीं आमिर खान और जूही चावला को सर्वश्रेष्ठ मेल डेब्यू और सर्वश्रेष्ठ फीमेल डेब्यू का पुरस्कार दिलाया.   





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