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Kanwar Yatra 2026: हरिद्वार में कांवड़ मेले का अंतिम चरण, पैदल कांवड़ यात्रा के बाद शुरू हुई डाक कांवड़ यात्रा | kanwar yatra 2026 haridwar kanwar mela final phase dak kanwar yatra begins


Kanwar Yatra 2026: हरिद्वार में कांवड़ मेला अब अपने अंतिम चरण की और बढ़ रहा है. पैदल कांवड़ यात्रा के बाद अब डाक कांवड़ का दौर शुरू हो चुका है. देश के अलग-अलग राज्यों से भगवान शिव के भक्त अपने वाहनों के जरिए हरिद्वार पहुंच रहे हैं और गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में जलाभिषेक करने के लिए रवाना हो रहे हैं. 

सावन में हर तरफ शिवमय माहौल

जलाभिषेक में अब कम ही समय बचा है, लेकिन शिव भक्तों की आस्था और श्रद्धा में कमी नहीं दिखाई दे रही है. सावन महीने में भगवान शिव के प्रति समर्पण हरिद्वार की सड़कों, घाटों और गंगा के तटों पर साफ नजर आ रहा है. कोई भक्त कंधों पर कांवड़ रखकर यात्रा कर रहा है, तो कोई कोई अपने वाहनों पर आकर जल ले जा रहा है. कई ऐसे श्रद्धालु भी देखने को मिले हैं, जो लेट-लेटकर अपनी कांवड़ यात्रा को पूरा कर रहे हैं.

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प्रशासन ने किए कई इंतजाम

कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने भी कई इंतजाम किए हैं. गंगा के तेज प्रवाह को देखते हुए सुरक्षा के लिए जल प्रवाह को नियंत्रित किया गया है ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो. हालांकि इस बार कांवड़ मेले के अंतिम चरण में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पिछले सालों की तुलना में हरिद्वार में कांवड़ियों की संख्या कम नजर आ रही है. आमतौर पर जलाभिषेक से पहले हरिद्वार में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ता था, लेकिन इस बार वैसी भीड़ दिखाई नहीं दे रही है. इसके पीछे प्रशासन की ओर से लगाए गए कुछ प्रतिबंध और मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है. 

श्रद्धालुओं की संख्या पर पड़ रहा असर

प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई नियम लागू किए हैं. बड़े डीजे वाली कांवड़ों और निर्धारित ऊंचाई से अधिक ऊंची कांवड़ों को उत्तराखंड सीमा से वापस भेजा दिया गया है. वहीं, कांवड़ की ऊंचाई और को लेकर भी नियम तय किए गए हैं. माना जा रहा है कि इन प्रतिबंधों का असर श्रद्धालुओं की संख्या पर भी पड़ा है. इसके बावजूद शिव भक्तों की आस्था, उत्साह और भक्ति में कोई कमी नहीं है.

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