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दीपक प्रकाश की मंत्री कुर्सी बची, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले बिहार विधान परिषद में किए गए मनोनीत | Deepak Prakash nominated to the Bihar Legislative Council ahead of the Supreme Court hearing



पटना:

बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद में मनोनीत कर दिए गए हैं. उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है. सर्वोच्च अदालत में अगली सुनवाई होती, उससे पहले दीपक प्रकाश को विधान परिषद में मनोनीत किया गया. उनके मनोनयन के साथ ही मंत्री पद पर लटक रही तलवार हट गई. बीते दिनों भाजपा के एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे से एक पद खाली हुई थी. उसी पद पर दीपक प्रकाश को पर राज्यपाल ने मनोनीत किया.

मिली जानकारी के अनुसार बिहार सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल ने बुधवार को पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (एमएलसी) का सदस्य मनोनीत किया. इस संबंध में निर्वाचन विभाग ने अधिसूचना जारी की.

बिहार गजट में प्रकाशित निर्वाचन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (ङ) तथा खंड (5) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने यह मनोनयन किया.

यह मनोनयन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई सीट के लिए किया गया है. दीपक प्रकाश का कार्यकाल 16 मार्च, 2027 तक रहेगा.

दीपक प्रकाश का मनोनयन हाल में उठे संवैधानिक प्रश्नों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि किसी सदन का सदस्य नहीं होने के बावजूद वह मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं.

संविधान के प्रावधानों के अनुसार, मंत्री नियुक्त किए जाने के छह महीने के भीतर संबंधित व्यक्ति का विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है. ऐसा नहीं होने पर उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है.

ऐसे में दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया जाना सरकार द्वारा संवैधानिक प्रावधानों के अनुपालन की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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