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5 साल में ED ने दर्ज किए 4622 केस, सिर्फ 43 में ही कोर्ट में साबित हो पाया आरोप, मंत्री ने संसद में दी जानकारी | ED registered 4,622 cases in 5 years charges proven in court in only 43 cases Minister informs Parliament 



वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली प्रमुख एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कामकाज को लेकर संसद में पेश आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है. राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में ईडी ने हजारों मामले दर्ज किए, लेकिन उनमें से बेहद कम मामलों में अदालतों से दोष सिद्धि हो सकी.

4622 मामलों में सिर्फ 43 में ही हुई दोष सिद्धि

राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कुल 4622 मामले दर्ज किए. इनमें से केवल 43 मामलों में ही दोष सिद्धि हो सकी. आंकड़ों के अनुसार यह कुल मामलों का 1 प्रतिशत से भी कम है. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि वर्ष 2021-22 में ईडी ने 1116 मामले दर्ज किए थे, लेकिन उनमें से सिर्फ तीन मामलों में ही दोष सिद्धि हुई.

सांसद के सवाल पर सरकार ने दी जानकारी

यह जानकारी सीपीएम सांसद डॉ. वी. सिवदासन द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में दी गई. सांसद ने सरकार से पूछा था कि पिछले पांच वर्षों में ईडी और आयकर विभाग ने कितने मामले दर्ज किए, कितनों में सुनवाई शुरू नहीं हुई, कितने आरोपी विचाराधीन हैं और कितने मामलों में दोष सिद्धि या बरी होने की स्थिति सामने आई है. जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने दोनों एजेंसियों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े सदन के पटल पर रखे.

1243 गिरफ्तारियां, 104 आरोपियों को सजा

सरकार ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान ईडी ने पीएमएलए के तहत 1243 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें से अब तक 104 आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्धि हो चुकी है. इससे साफ है कि जांच और गिरफ्तारी की बड़ी संख्या के मुकाबले अदालतों में सजा मिलने के मामले काफी सीमित रहे हैं.

आयकर विभाग का रिकॉर्ड ईडी से बेहतर

राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार आयकर विभाग ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच कुल 2127 अभियोजन मामले दर्ज किए. इनमें से 233 मामलों में दोष सिद्धि हुई. इस तरह आयकर विभाग का कन्विक्शन रेट लगभग 10.95 प्रतिशत रहा. हालांकि इन मामलों में 854 आरोपियों को अदालतों से बरी भी किया गया. इसके बावजूद दोष सिद्धि का प्रतिशत ईडी के मुकाबले काफी अधिक रहा.

आंकड़ों पर बढ़ सकती है बहस

संसद में पेश ये आंकड़े वित्तीय अपराधों की जांच, मुकदमों की प्रगति और अदालतों में दोष सिद्धि की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं. एक तरफ ईडी द्वारा बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दोष सिद्धि का प्रतिशत बेहद कम दिखाई दे रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है.

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