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Mangla Gauri Vrat Katha: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, पूजा के दौरान जरूर पढ़ें ये व्रत कथा | Mangla Gauri Vrat 2026 first mangla gauri vrat read vrat katha


आज यानी 4 अगस्त को सावन मास का पहला मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है. इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से कन्याओं और सुहागिन स्त्रियों को योग्य वर और सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही मां पार्वती भी अपनी कृपा बनाए रखती हैं. मंगला गौरी व्रत पर पूजा के दौरान मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. इसके बाद मां गौरी के मंत्रों का जाप करें, कथा सुनें और आरती करने के बाद भोग लगाकर पूजा समाप्त करें.

मंगला गौरी व्रत कथा

मंगला गौरी व्रत से एक बहुप्रचलित पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. इस कथा के अनुसार प्राचीन समय में धर्मपाल नामक सेठ रहता था जिसके पास धन की कोई कमी नहीं थी. यह सेठ सर्वगुण संपन्न था और भगवान शिव (Lord Shiva) का परम भक्त भी था. सेठ धर्मपाल की शादी एक गुणवान बहु से हुई थी लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं थी. संतान प्राप्ति की कोशिश में दोनों पति-पत्नी लंबे समय से जुटे हुए थे. सेठ ने एक पंडित से पूछा तो उन्होंने महादेव और माता पार्वती की पूजा करने की सलाह दी. इसके बाद दोनों पति-पत्नी महादेव और मां गौरी की उपासना करने लगे. 

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इस उपासना से प्रसन्न होकर महादेव और मां पार्वती ने धर्मपाल की पत्नी के समक्ष प्रकट होकर उसे कहा कि वह जो वरदान मांगना चाहे मांग सकती है. इसपर धर्मपाल की पत्नी ने संतान प्राप्ति की इच्छा जताई. भगवान शिव और मां पार्वती (Maa Parvati) ने धर्मपाल और उसकी पत्नी को संतान का वरदान दिया लेकिन साथ में यह भी बताया कि संतान अल्पायु होगी. 

धर्मपाल के घर पुत्र ने जन्म लिया. ज्योतिष से सलाह लेने के पश्चात धर्मपाल ने अपने पुत्र की शादी ऐसी कन्या से करवाई जो मंगला गौरी व्रत रखा करती थी. समय बीतने पर पता चला कि धर्मपाल के पुत्र की मृत्यु नहीं हुई और वह दीर्घायु तक जी पाया. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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