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6 महीने से न विधायक न MLC फिर कैसे मंत्री बने हैं दीपक प्रकाश? सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा सवाल | Bihar Minister Deepak Prakash Case Supreme Court asked question to Bihar Govt How



नई दिल्ली:

Deepak Prakash Case: बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा है. मंत्री दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और ना ही विधान परिषद के. लेकिन वो मंत्री के पद पर हैं. नियम के अनुसार मंत्री को 6 महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य होना जरूरी है. लेकिन दीपक प्रकाश के मामले में इस नियम का पालन होता नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने बिहार सरकार से पूछा- यह कानून का शुद्ध प्रश्न है. राज्य सरकार को यह बताना होगा कि कोई मंत्री बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है?

27 अगस्त को होगी इस मामले में अगली सुनवाई

सीजेआई ने आगे कहा कि आपको इसका स्पष्टीकरण देना होगा. सुप्रीम कोर्ट 27 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा- अब छह महीने से अधिक समय हो चुका है और वह अब भी मंत्री बने हुए हैं. 

इस पर बिहार सरकार की ओर से कहा गया कि मामला पहले से ही 27 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. राज्य सरकार ने कहा कि वो न्यायालय के विवेक पर छोड़ते हैं.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार के गृह मंत्री दीपक प्रकाश संविधान के अनुच्छेद 164(4) में निर्धारित छह महीने की सीमा समाप्त होने के बाद भी मंत्री पद पर बने हुए हैं, जबकि वे अभी तक राज्य की किसी भी विधायिका के सदस्य नहीं बने हैं.

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं दीपक प्रकाश

मालूम हो कि दीपक प्रकाश NDA में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. सम्राट चौधरी कैबिनेट के शपथ ग्रहण में उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी. तब दीपक का मंत्री बनना चौंकाने वाला फैसला था. बाद में यह कयास लगाए गए कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सकता है. लेकिन बीते दिनों राज्य में हुए विधान परिषद के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया. जिसके बाद उनके मंत्री पद पर तलवार लटक रही है.

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