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Exclusive: ‘विपक्षियों का मकसद आग भड़काना था, लेकिन…’ पेपर लीक विवाद पर एकनाथ शिंदे | Exclusive Eknath Shinde terms paper leak unfortunate credits journalists for Operation Tiger


मुंबई:

महाराष्‍ट्र के उपमुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे नीट पेपर लीक को दुर्भाग्‍यपूर्ण मानते हैं, लेकिन साथ ही उनका यह भी कहना है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. NDTV से खास बातचीत में एकनाथ शिंदे ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा भविष्‍य में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सख्‍त कदम उठाए हैं, जिनका असर यकीनन देखने को मिलेगा. लेकिन इससे पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के पास जाकर जो विरोध प्रदर्शन किया, वो नियमों का उल्‍लंघन था, उन्‍हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. इस दौरान एकनाथ शिंदे ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को पत्रकारों की देन बताया और कहा कि हम किसी को लेने नहीं जाते हैं, जो हमारी नीति से इत्‍तेफाक रखता है, वो खुद हमारे साथ जुड़ने आता है. पढ़िए, एकनाथ शिंदे का खास इंटरव्‍यू. 

सवाल: पिछले कुछ दिनों में मुंबई से लेकर दिल्ली तक GEN Z आंदोलन हुआ, आप इस आंदोलन को किस नजरिए से देखते हैं?

जवाब : नीट का पेपर लीक होना ये तो दुर्भाग्यपूर्ण बात है, क्योंकि उससे लाखों छात्रों का जीवन और भविष्य जुड़ा होता है. छात्र देश के भविष्य हैं. इसलिए पेपर लीक नहीं होना चाहिए था, लेकिन हो गया. हालांकि, उससे दुर्भाग्यपूर्ण बात है इसका राजनीतिकरण करना. इस मुद्दे पर आज युवाओं के साथ छात्रों के साथ हम लोग खड़ हैं. देश के प्रधानमंत्री है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसको बहुत गंभीरता से लिया हुआ है. तुरंत इसमें अनेक निर्णय लिए गए. फास्ट ट्रैक कोर्ट लाया, 10 साल की सजा, 10 करोड़ रुपये का जुर्माना… फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलेगा. टास्क फोर्स भी बनाई गई है, उसमें नंदन नीलकणी जैसे व्यक्तियों को शामिल किया गया है. एक्जाम में रिफॉर्म्स लाने के लिए ये अहम कमिटी काम करेगी. इस मामले में अभी तक काफी कड़े कदम उठाए गए हैं. 47 लोगों को निकाल दिया, शिक्षा विभाग के सचिव को निकाल दिया, शिक्षा विभाग के महासंचालक को निकाल दिया. नैतिकता के आधार पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपना इस्‍तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया. ये सभी इसीलिए किया गया, क्‍योंकि छात्र देश का भविष्‍य हैं. 

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सवाल: लेकिन क्या जिस तरीके से विद्यार्थियों को पीटा गया, जिस तरीके से डंडे चलाए गए दिल्ली में, क्या ये सही था?

जवाब: नहीं, हम इसका समर्थन कहां कर रहे हैं. लेकिन किस परिस्थिति में ऐसा हुआ, इसकी जांच होगी. सीबीआई जांच कर रही है. प्रधानमंत्री खुद इस पर ध्यान दे रहे हैं और खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं. इसकी जांच जरूर होगी. लेकिन यहां जो राजनीति हो रही है, उस पर भी गौर करना जरूरी है. राहुल गांधी भी गए थे. प्रधानमंत्री आवास के सामने भी आंदोलन हुआ और वहां उन्हें हिरासत में भी लिया गया. देखिए, राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं. इंदिरा गांधी जी की हत्या हुई थी. ये भी बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी. ये दिल्ली में, उनके निवास स्थान पर हुई थी. उसके बाद ही एसपीजी कानून बना और प्रधानमंत्री निवास के आसपास एक हाई सिक्योरिटी जोन बनाया गया. वहां कोई भी आंदोलन नहीं कर सकता, ये बात राहुल गांधी जी को भी पता है. फिर ये आंदोलन वहां क्यों किया गया? आंदोलनकारी तो जंतर-मंतर पर थे. अब उन्हें वहां आंदोलन करने की क्या जरूरत पड़ गई? ये एक बहुत बड़ी और खतरनाक साजिश हो सकती है. प्रधानमंत्री का निवास एक संवेदनशील इलाका होता है. प्रधानमंत्री कोई भी व्यक्ति हो, लेकिन वो देश का प्रधानमंत्री होता है. वहां कानून-व्यवस्था बिगाड़ना बहुत गलत बात है. मुझे लगता है कि ये लोग बार-बार बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका का नाम ले रहे थे. क्या इनकी मंशा देश में अराजकता फैलाने की थी? क्या ये छात्रों और युवाओं के आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे थे?  ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है.मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं. 

प्रधानमंत्री का निवास एक संवेदनशील इलाका होता है. प्रधानमंत्री कोई भी व्यक्ति हो, लेकिन वो देश का प्रधानमंत्री होता है. वहां कानून-व्यवस्था बिगाड़ना बहुत गलत बात है. मुझे लगता है कि ये लोग बार-बार बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका का नाम ले रहे थे. क्या इनकी मंशा देश में अराजकता फैलाने की थी? क्या ये छात्रों और युवाओं के आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे थे?

सवाल: विरोधियों का आरोप है कि सरकार ने विद्यार्थियों पर काफी अत्याचार किया? 

जवाब: देखिए, पुलिस द्वारा जो भी अत्याचार हुआ होगा, लाठीचार्ज हुआ होगा, उसकी जांच जरूर होगी. अभी प्रधानमंत्री जी खुद इस मामले को प्राथमिकता दे रहे हैं. उन्होंने इसे बहुत गंभीरता से लिया है. जो गलत होगा उसकी जांच होगी और कार्रवाई भी होगी. लेकिन साथ ही छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश भी हो रही है. आज केजरीवाल कह रहे हैं कि राहुल गांधी क्रेडिट लेने के लिए अपना आंदोलन कर रहे हैं. सोनम वांगचुक की पत्नी ने भी कहा है कि ये कांग्रेस की नौटंकी शुरू हो गई है. यहां से कोई जाता है तो वो आग लगाने की बात करता है. कहता है – ‘अभी आग लग गई है, इसे बुझने मत दो.’ ये क्या है? इनका मकसद देश को जलाना है.देश में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का मकसद है. लेकिन ऐसे लोग जीत नहीं सकते. ये लोग आपातकाल से तुलना कर रहे हैं. आपातकाल में तो सबको जेल में ठूंस दिया गया था. बेकसूर लोगों को जेल में डाला गया था और सिखों का नरसंहार किया गया था. उस समय महाराष्ट्र में हिंदू हृदयसम्राट बाला साहेब ठाकरे जी ने सिखों को बचाया था. तो आपातकाल लगाने वाले और सिखों की हत्या करने वाले, उन्हें बोलने का नैतिक अधिकार क्या है? छात्रों के साथ हमारी पूरी संवेदना है. NEET की परीक्षा का पेपर लीक होना उनके लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है. लेकिन सारे आरोपी अब जेल के अंदर हैं. पीएम मोदी ने कहा है – ‘एक को भी नहीं बख्शेंगे.’ उन्हें अंदर डाल दिया गया है और उन्हें कड़ी सजा होगी. लेकिन ये क्या है? यहां सिर्फ झूठे श्रेय की लड़ाई चल रही है. कौन क्या बोलता है. श्रेय लेने के लिए इंडिया गठबंधन भी एकजुट नहीं है, उनके अंदर भी फूट है.

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सवाल: महाराष्ट्र से दो बड़े नेता दिल्ली गए. एक उद्धव ठाकरे जिन्‍होंने जंतर-मंतर के मंच पर जाकर भाषण दिया और दूसरे शरद पवार जो जंतर-मंतर भी गए और प्रधानमंत्री जी से भी मिले. आप इन दोनों को कैसे देखते हैं? 

जवाब: ये जंतर-मंतर पर गए और आग लगाने वाली भाषा बोली. वह बोले- ‘अभी आग लग गई है, इसे बुझने मत दो.’  छात्रों को न्याय कैसे मिले, इसके लिए सुझाव दो, मांग करो. ये छात्र आग लगाने के लिए नहीं हैं. ये छात्र हमारे देश का भविष्य बनाने के लिए हैं. ये युवा पीढ़ी ही हमारे देश का भविष्य बनाएगी. लेकिन ये लोग कह रहे हैं- ‘आग लगा दो.’ क्योंकि इन्हें जनता ने ठुकरा दिया है. जनता की अदालत में ये हार गए हैं. अब अपनी पार्टी बचाने के लिए ये उस प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं. वहीं, पवार साहब वहां गए. उन्होंने आंदोलनकारियों से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री जी से भी मिले. बाद में उन्होंने कहा भी कि मैंने कुछ सुझाव दिए हैं, ताकि छात्रों को न्याय मिले. मेरे हिसाब से इंडिया गठबंधन में बाकी लोगों को पवार साहब से सीखना चाहिए.

NEET की परीक्षा का पेपर लीक होना उनके लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है. लेकिन सारे आरोपी अब जेल के अंदर हैं. मोदी जी ने कहा है – ‘एक को भी नहीं बख्शेंगे.’ उन्हें अंदर डाल दिया गया है और उन्हें कड़ी सजा होगी. लेकिन ये क्या है? यहां सिर्फ झूठे श्रेय की लड़ाई चल रही है. कौन क्या बोलता है. श्रेय लेने के लिए इंडिया गठबंधन भी एकजुट नहीं है, उनके अंदर भी फूट है.

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सवाल: अच्छा, पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र और पूरे देश में शिवसेना के ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा है. आप काफी समय से इसकी तैयारी कर रहे थे और आपके बेटे, सांसद श्रीकांत शिंदे भी इसमें लगे थे. क्या ये सिर्फ शुरुआत है या आने वाले दिनों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के और भी हिस्से देखने को मिलेंगे?  

जवाब: ये सब पत्रकारों के सवाल हैं, इसका जवाब भी पत्रकारों को ही देना है. देखिए, हम किसी को तोड़ने नहीं जाते. हम जोड़ने वाले हैं. हम बिगाड़ने वाले नहीं, हम बनाने वाले हैं. 2022 में हमने जो बगावत की थी, वो किसी की सरकार तोड़ने के लिए नहीं थी. हम किसी की सत्ता हथियाकर नहीं गए, हम इस्तीफा देकर गए. हमने मंत्री पद छोड़ा, त्याग किया. लेकिन जनता ने हमें स्वीकार किया. क्यों? क्योंकि हम बाला साहेब ठाकरे जी के विचारों को आगे ले गए. हमने हिंदुत्व के विचार को आगे बढ़ाया. हमने विकास का एजेंडा आगे रखा. कुछ लोगों ने कुर्सी के लिए बाला साहेब ठाकरे जी के विचारों को त्याग दिया. सत्ता के लिए सब कुछ छोड़ दिया. इसलिए मैं कहता हूं, जो लोग हमारे पास आते हैं, हम उनका स्वागत करते हैं. लेकिन जिनके पास से आते हैं, उनके लिए जब तक वे साथ होते हैं तब तक अच्छे होते हैं. और जैसे ही छोड़ते हैं, वैसे ही बुरे हो जाते हैं. उन्हें सोचना चाहिए कि लोग उनसे दूर क्यों जा रहे हैं. उन्हें आत्मपरीक्षण करना चाहिए. 

सवाल: क्या आपको लगता है कि आने वाले दिनों में संजय राउत, आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे को छोड़कर शिवसेना के बाकी बचे सांसद और विधायक आपके साथ आएंगे या आप उन्हें अपने साथ लाएंगे?  

जवाब: हम किसी को लाने नहीं जाते और ना ही किसी को तोड़ने जाते हैं. हम अपनी जगह पर हैं और अपना काम कर रहे हैं. लोगों का हम पर विश्वास है. उन्होंने ढाई साल का मेरा मुख्यमंत्री कार्यकाल देखा है. जब महाविकास अघाड़ी की सरकार थी, तब उन्होंने सारे काम रोक दिए थे, ब्रेक लगा दिए थे, हर काम में स्पीड ब्रेकर डाल दिए थे. हमने उन्हें उखाड़कर फेंक दिया. उसके बाद सरकार में ढंग से काम हुआ. विकास हुआ, कल्याणकारी योजनाएं आईं. इसलिए लोगों का अपने आप विश्वास बढ़ा है. आज देवेंद्र जी हैं, हम सब मिलकर टीम बनाकर काम कर रहे हैं.

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