

नई दिल्ली:
लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा हो रही है. इस बिल में कठोर दंड का प्रावधान है. जेल और जुर्माना में भारी बढ़ोतरी की गई है साथ में मामले का निबटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट में किया जाएगा. जब इस बिल को सोमवार को पेश किया गया था तब लोकसभा अध्यक्ष ने सभी सांसदों को तीन घंटे का समय दिया था कि यदि कोई सांसद इस बिल में कोई संशोधन देना चाहता है तो वो लोकसभा सचिवालय में इसे दे सकता है.
क्या-क्या संशोधन आए हैं?
इसके बाद लोकसभा सचिवालय के पास 93 संशोधन आए हैं जिसे सांसद बिल में जोड़ना चाहते हैं. इतने सारे संशोधनों में से कुछ संशोधन जो महत्वपूर्ण हो सकते हैं. उनमें से एक केरल के आरएसपी के सांसद प्रेमचंदरन ने अपने संशोधन में कहा है कि राज्य सरकार को SIT बनाने का अधिकार होना चाहिए जबकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने अपने संशोधन नोटिस में कहा है कि पेपर लीक मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होना चाहिए.
केरल से कांग्रेस के सांसद डीन कुरियाकोस ने अपने संशोधन में कहा है कि whistle blower का बचाव करने का प्रावधान बिल में जोड़ना चाहिए. समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्या ने अपने संशोधन में कहा है कि जांच दो महीने में नहीं 90 दिनों में पूरी की जानी चाहिए.
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क्या बिल का हिस्सा बनेंगे ये संशोधन?
संसद में विपक्ष के सांसद कितने भी संशोधन दे सकते हैं मगर इसका मतलब ये नहीं है कि उसमें से किसी को बिल का हिस्सा बनाया जाएगा. होता ये है कि सरकार केवल अपने संशोधनों को ही बिल का हिस्सा बनाती है. वैसे भी लोकसभा में जिस बिल पर बहस चल रही है वह भी संशोधन बिल ही है जिसमें पिछले कानून में संशोधन किया जा रहा है.
जब लोकसभा में इस बिल पर वोटिंग होगी तब विपक्ष के सांसद अपने संशोधन पेश करेंगे और उस पर वोटिंग होगी और वो संशोधन गिर जाएंगे क्योंकि सदन में एनडीए को बहुमत है.
यह भी देखा गया है कि सभी संशोधन को विपक्ष के सांसद वोटिंग के लिए नहीं लाते हैं. अक्सर हर एक विपक्षी दल का एक दो सांसद ही वोटिंग के लिए संशोधन को पेश करते हैं. इसलिए कितने भी संशोधन विपक्ष लाए सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि कोई भी संशोधन पास नहीं होगा.





