

राजधानी लखनऊ में भाजपा ओबीसी मोर्चा से जुड़े वरिष्ठ नेता और वर्ष 2006 में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रहे नानकदीन भुर्जी की नए विधायक आवास की सातवीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई. गंभीर हालत में उन्हें हजरतगंज पुलिस उन्हें सिविल अस्पताल लेकर पहुंची थी, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने बताया कि नानकदीन भुर्जी को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी. उनके दोनों पैरों में फ्रैक्चर था. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. उन्होंने कहा कि मौत के वास्तविक कारण और घटना की परिस्थितियां पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी.
जानकारी के मुताबिक, नानकदीन भुर्जी 357 बेल्थरा रोड से सुभासपा विधायक हंसू राम के विधायक आवास पर पहुंचे थे. उन्होंने विधायक के प्रतिनिधि से कॉफी बनाने के लिए कहा. जब प्रतिनिधि कॉफी लेकर वापस लौटा तो भुर्जी कमरे में नहीं मिले. कुछ देर बाद सुरक्षा कर्मियों ने सूचना दी कि वह नीचे गिरे पड़े हैं. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल ले जाया गया.
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
एडीसीपी सेंट्रल जितेंद्र दुबे ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह हादसा था, आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है. पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है.
भाजपा नेताओं ने दी जानकारी
भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने बताया कि उन्हें कार्यालय में सूचना मिली थी कि नानकद्दीन भुर्जी सातवीं मंजिल से गिर गए हैं. अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. भुर्जी के रिश्तेदार अनुज ने बताया कि उन्हें किसी प्रकार की बीमारी नहीं थी. ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत से परिवार और समर्थकों में शोक के साथ कई सवाल भी उठ रहे हैं.
राजनीतिक सफर
नानकदीन भुर्जी लंबे समय तक पिछड़ा वर्ग की राजनीति में सक्रिय रहे. वर्ष 2006 में उन्हें समाजवादी पार्टी सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया गया था और वह मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे. साल 2009 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया, जिसके बाद वह भाजपा के पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोर्चा से जुड़े और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई. इसके अलावा उन्होंने ‘हिंदुस्तान पिछड़ा मोर्चा’ नाम से एक संगठन की स्थापना की थी, जिसके वह राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि सातवीं मंजिल से गिरने के पीछे हादसा था, आत्महत्या या कोई अन्य वजह.
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