

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal के नाम से वायरल हो रहे कुछ वीडियो को लेकर Press Information Bureau (PIB) ने बड़ा खुलासा किया है. PIB की Fact Check Unit ने इन वीडियो को पूरी तरह फर्जी और AI से तैयार बताया है. ब्यूरो का कहना है कि इन वीडियो में दिखाई और सुनाई गई बातें प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्री ने कभी नहीं कही हैं. साथ ही कहा गया है कि इन वीडियो को पाकिस्तान समर्थित प्रोपेगेंडा नेटवर्क के जरिए गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से शेयर किया जा रहा है.
PIB ने वीडियो को बताया AI Generated
PIB की Fact Check Unit के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो Artificial Intelligence की मदद से तैयार किए गए हैं. इनमें प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal की आवाज और वीडियो में डिजिटल बदलाव किए गए हैं ताकि ऐसा लगे कि उन्होंने कुछ विवादित बयान दिए हैं. PIB ने साफ कहा है कि वीडियो में दिखाई गई बातें पूरी तरह भ्रामक हैं और इन पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
🚨 DEEPFAKE VIDEO ALERT!
Pakistani propaganda accounts are circulating a video of Prime Minister @narendramodi featuring fabricated statements that he never made regarding the protest in Delhi. #PIBFactCheck:
❌ This is an ‘#AI-generated deepfake video’ shared to mislead the… pic.twitter.com/OEZHxjlKsz
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 24, 2026
छात्रों को धमकाने वाला दावा निकला फर्जी
वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री को छात्रों को धमकाते हुए और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हुए दिखाया गया है. PIB के अनुसार, यह दावा पूरी तरह झूठा है. वीडियो में ऑडियो को काटकर और डिजिटल तरीके से बदलकर ऐसा प्रभाव पैदा किया गया है, जिससे लोगों को भ्रमित किया जा सके.
पुराने वीडियो से की गई छेड़छाड़
PIB Fact Check Unit के मुताबिक प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस वीडियो में बदलाव किया गया है, जिसमें उन्होंने गुरुवार रात पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था. इसी तरह संसद परिसर के बाहर केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal के एक बयान की ऑडियो को भी डिजिटल रूप से बदल दिया गया, ताकि ऐसा लगे कि वह प्रदर्शन कर रहे छात्रों को धमकी दे रहे हैं. PIB का कहना है कि दोनों वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है.
⚠️ Fake Video Alert!
Pakistani propaganda accounts are circulating a video of Union Minister Piyush Goyal claiming that he made threatening remarks about the protesting students. #PIBFactCheck:
❌This video is #Fake and AI-generated.
✅ Union Minister @piyushgoyal did… pic.twitter.com/lowN3RxaHl
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 24, 2026
फर्जी वीडियो से सावधान रहने की अपील
PIB ने लोगों से अपील की है कि सोशल Media पर वायरल होने वाले ऐसे वीडियो पर बिना जांच किए भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध दावे की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से जरूर करें. AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच फर्जी वीडियो और ऑडियो के जरिए गलत जानकारी फैलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ऐसे में किसी भी वायरल कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है.
आज के दौर में सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो जाते हैं, जिन्हें देखकर असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है. इन वीडियो को Deepfake कहा जाता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए ये वीडियो किसी भी व्यक्ति को ऐसी बातें कहते या ऐसे काम करते हुए दिखा सकते हैं, जो उसने कभी किए ही नहीं.
Deepfake Video क्या होता है?
Deepfake एक ऐसी तकनीक है, जिसमें AI किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और हावभाव की नकल करके नया वीडियो तैयार करता है. “Deepfake” शब्द Deep Learning और Fake से मिलकर बना है. इस तकनीक की मदद से ऐसा लगता है कि वीडियो पूरी तरह असली है, जबकि वास्तव में उसे AI ने बनाया या बदला होता है.
Deepfake Video कैसे बनता है?
Deepfake बनाने के लिए AI कई चरणों में काम करता है. सबसे पहले AI किसी व्यक्ति की सैकड़ों या हजारों फोटो और वीडियो का विश्लेषण करता है. इसके बाद वह चेहरे की बनावट, आंखों की झपक, मुस्कान, बोलने का तरीका और चेहरे की हर छोटी-बड़ी हरकत को सीखता है.
फिर AI किसी दूसरे वीडियो में उस व्यक्ति का चेहरा इस तरह जोड़ देता है कि होंठों की हरकत, चेहरे के भाव और आवाज एक-दूसरे से मेल खाते दिखाई देते हैं. यही वजह है कि Deepfake वीडियो पहली नजर में असली लग सकते हैं.
Deepfake का इस्तेमाल कहां होता है?
Deepfake तकनीक का इस्तेमाल कई सकारात्मक कामों में भी किया जा रहा है. फिल्म इंडस्ट्री में विजुअल इफेक्ट्स, मनोरंजन, डिजिटल कंटेंट और क्रिएटिव वीडियो बनाने में इसका उपयोग होता है. हालांकि, इसका गलत इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. फर्जी वीडियो बनाकर लोगों की छवि खराब करना, राजनीतिक गलत जानकारी फैलाना और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना इसके बड़े खतरे हैं.
Deepfake से कैसे हो सकता है नुकसान?
साइबर अपराधी Deepfake की मदद से वीडियो कॉल पर किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनाकर लोगों से पैसे ठग सकते हैं. इसके अलावा फर्जी वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और गलत जानकारी फैलाने जैसे अपराध भी किए जा रहे हैं. इसी वजह से दुनियाभर की सरकारें और टेक कंपनियां Deepfake की पहचान करने वाली नई तकनीकों पर काम कर रही हैं.
Deepfake Video की ऐसे करें पहचान
अगर किसी वीडियो में चेहरे की हरकतें असामान्य लगें, होंठ और आवाज मेल न खाएं, आंखों की झपक अजीब लगे या वीडियो की क्वालिटी अलग-अलग दिखाई दे, तो वह Deepfake हो सकता है. किसी भी वायरल वीडियो पर भरोसा करने से पहले उसे विश्वसनीय स्रोत से जरूर जांच लें.
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