

आज सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग के दौर में प्यार का इजहार करना बेहद आसान हो गया है. कुछ सेकेंड में भेजा गया एक मैसेज दिल की बात सामने वाले तक पहुंचा देता है. लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब मोहब्बत के पैगाम को कागज पर उतारकर डाक के जरिए भेजा जाता था. खत का इंतजार भी प्रेम कहानी का हिस्सा हुआ करता था. इसी पुराने अंदाज-ए-मोहब्बत की याद दिलाता है 1968 का एक बेहद खूबसूरत गीत, जिसे लता मंगेशकर और मुकेश ने अपनी आवाज दी थी. खास बात यह है कि इस मशहूर गाने की कहानी भी एक खत से ही जुड़ी हुई है.
एक खत और फूल ने दिया गाने का आइडिया
कहा जाता है कि एक बार संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी को उनके एक प्रशंसक का खत मिला. इस खत के साथ एक फूल रखा गया था और उस पर लिपस्टिक का निशान भी था. खत के अंदर छिपा यह रोमांटिक अंदाज संगीतकार के लिए काफी दिलचस्प था. उन्होंने यह खत गीतकार इंदीवर को दिखाया. बताया जाता है कि खत, फूल और उस पर लगी लिपस्टिक ने इंदीवर को तुरंत एक गीत का विचार दे दिया. इसी अनुभव से प्यार का पैगाम लिए उस गीत की शुरुआती पंक्तियां आकार लेने लगीं.
लता-मुकेश की आवाज ने बना दिया यादगार
इस किस्से से जिस गीत का जन्म हुआ, वह है ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’. इंदीवर के लिखे इस गीत को लता मंगेशकर और मुकेश ने अपनी आवाज से ऐसी मिठास दी कि यह प्रेम गीत हमेशा के लिए लोगों की यादों में बस गया. गीत के बोलों में प्रेमी अपनी भावनाओं को फूल और खत के जरिए सामने वाले तक पहुंचाता है. यही वजह है कि आज भी जब पुराने जमाने के रोमांस की बात होती है तो इस गाने का जिक्र जरूर आता है. इसकी सादगी ही इसकी सबसे बड़ी खूबी मानी जाती है.
1968 की ‘सरस्वतीचंद्र’ का हिस्सा था ये गीत
‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘सरस्वतीचंद्र’ का गीत है. फिल्म में नूतन और मनीष ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं और यह फिल्म अपने दौर की चर्चित फिल्मों में शामिल रही. फिल्म के संगीत को दर्शकों ने खूब पसंद किया और इसके कई गीत लोकप्रिय हुए. इनमें ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’ ने खास पहचान बनाई. आज डिजिटल दौर में भले ही खत लिखने का चलन लगभग खत्म हो गया हो, लेकिन यह गीत उस दौर की मोहब्बत को जिंदा रखता है, जब एक फूल और कुछ लिखे हुए शब्द किसी के लिए पूरी दुनिया जितने खास हुआ करते थे.





