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5 साल की पॉलिसी बताकर बेच दी 53 साल की स्कीम, कंपनी को देने होंगे 6 लाख रुपये, पॉलिसी लेते समय इन बातों का रखें ध्यान | Keep these points in mind when purchasing a Insurance policy chandigarh misselling case



Tips To Buy Insurance Policy: चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने हाल ही में बीमा कंपनी पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. आयोग ने कंपनी को एक रिटायर्ड नौसेना अधिकारी को 6 लाख रुपये से ज्यादा अमाउंट वापस करने का आदेश दिया है. मामला गलत बिक्री (Mis-selling) से जुड़ा है, जिसमें ग्राहक को 5 साल की निवेश योजना बताकर लंबी अवधि की पॉलिसी बेच दी गई थी. शिकायत के अनुसार, रिटायर्ड अधिकारी को एक बीमा पॉलिसी यह कहकर बेची गई कि यह केवल 5 साल की निवेश योजना है. लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि असल में यह एक 53 साल तक चलने वाली योजना थी, जिसमें उन्हें हर साल लगभग 2.02 लाख रुपये जमा करने थे.

इस खुलासे के बाद उपभोक्ता ने आयोग का दरवाजा खटखटाया. मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने पाया कि ग्राहक को गलत और अधूरी जानकारी दी गई थी. इसी आधार पर कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया गया. यह मामला बताता है कि बीमा पॉलिसी लेते समय पूरी जानकारी और डॉक्युमेंट्स को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है. छोटी सी लापरवाही भी लंबे समय तक आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है.

बीमा लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?

बीमा या निवेश पॉलिसी लेते समय जल्दबाजी में निर्णय लेना भारी नुकसान का कारण बन सकता है. इसलिए इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

सही जानकारी लें 

  • पॉलिसी की अवधि. 
  • पॉलिसी के प्रीमियम का अमाउंट, जो समय-समय पर देना होता है. 

कवरेज और बीमा राशि की जरूरत समझें

  • जीवन बीमा में कवर आपकी सालाना इनकम का कम से कम 10–15 गुना होना चाहिए.
  • हेल्थ इंश्योरेंस में बढ़ते मेडिकल खर्चों को ध्यान में रखें.
  • व्हीकल इंशोरेंस में सही Insured Declared Value (IDV) इंश्योर करें.

कंपनी का बैकग्राउंड चेक करें 

  • बीमा कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (CSR) जरूर देखें. इससे आपको पता चलेगा कि कंपनी कितने और कितनी जल्दी क्लेम्स का निपटारा करती है. 
  • आपके क्षेत्र में कैशलेस सुविधा वाले नेटवर्क अस्पतालों की जानकारी लें.
  • कंपनी के मौजूदा ग्राहकों के ऑनलाइन रिव्यु जरूर पढ़े. अगर संभव हो तो ऐसे लोगों से जानकारी लें, जिन्होंने पहले से पॉलिसी खरीद रखी है. 

प्रीमियम और छिपे हुए खर्च समझें

नियम व शर्तें जरूर पढ़ें

  • पॉलिसी में क्या-क्या कवर नहीं है, यह जरूर पढ़ें.
  • हेल्थ पॉलिसी में वेटिंग पीरियड को समझें.
  • जरूरत के अनुसार क्रिटिकल इलनेस या एक्सीडेंटल कवर जैसे राइडर्स जोड़ें.

पूरी जानकारी सही दें

मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा पॉलिसी की जानकारी छिपाएं नहीं, क्योंकि गलत जानकारी देने पर क्लेम रिजेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. 

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