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48 साल पुराना वो गाना जिसने रखा अमीर खुसरो की 700 साल पुरानी ब्रजभाषी कविता को आज तक जिंदा,लता-आशा की आवाज में अमर | Amir Khusrow 700 year old Braj Bhasha poem alive Lata Mangeshkar and Asha Bhosle 48 year old evergreen song Chaap Tilak Sab Cheeni Re



आनंद बक्शी हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकारों में से एक रहे हैं, जिन्होंने कई सुपरहिट गाने दिए हैं. आनंद बक्शी की कलम से निकले कुछ गाने तो मानो अमर हो चुके हैं, जिन्हें आज भी सुना जाता है. 48 साल पहले आनंद बक्शी ने एक गाना लिखा था, जो आज तक भी पुराना नहीं हुआ है. दरअसल जब आंखें मिलती हैं तो पहचान मिट जाती है. 13वीं सदी के सूफी कवि अमीर खुसरो का यह अमर कलाम ‘छाप तिलक सब छीनी रे’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि आत्मा की वह पुकार है जो सदियों से गूंज रही है. 

लता मंगेशकर और आशा भोसले 

1978 की फिल्म ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ में लता मंगेशकर और आशा भोसले की आवाज में यह गाना नई जान लेकर आया. आनंद बक्शी ने खुसरो की कविता को अपनाया, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने उसे संगीत दिए. निर्देशक राज खोसला और सुदेश इस्सर की इस फिल्म में यह धुन दिलों को छू गई. 

सूफी जड़ों से बॉलीवुड तक

अमीर खुसरो ने यह कविता ब्रजभाषा में लिखी थी. इसमें प्रेम और ईश्वर के मिलन का गहरा भाव है. एक नजर में सारी छाप-तिलक छीन लेना. आनंद बक्शी ने इसे फिल्मी रूप दिया, जबकि लता और आशा की जुगलबंदी ने इसे लोकप्रिय बनाया. फिल्म की संगीत रचना लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की थी, जिन्होंने कई यादगार धुनें दीं. यह गाना कव्वाली शैली से प्रेरित है और आज भी यूट्यूब पर करोड़ों बार सुना जाता है.

फिल्म की कहानी और कास्ट

फिल्म मराठी उपन्यास आशी तुझी प्रीत पर आधारित है. इसमें आशा पारेख तुलसी का किरदार निभाती हैं, नूतन संजुक्ता, विनोद खन्ना अजय, और विजय आनंद ठाकुर राजनाथ. कहानी त्याग, प्रेम और परिवार की है. नूतन को इसके लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला. फिल्म सुपरहिट रही. 4 अगस्त 1978 को रिलीज हुई फिल्म ने भारत में लगभग 2.75 से 2.80 करोड़ रुपये की नेट कमाई की और सुपर हिट घोषित हुई. बजट करीब 1.40 करोड़ था.

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