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सूखे गांवों में लबालब भरे तालाब, डॉक्टर-सीए, इंजीनियरों ने कायम की मिसाल, UP-दिल्ली से हरियाणा तक बदली तस्वीर | water conservation campaign Jaladhikar Foundation constructed ponds Bhoojal Saptah in Uttar Pradesh Haryana Delhi


नई दिल्ली:

देश में शहरों के साथ ग्रामीण इलाके भी बारिश की कमी, सूखे के खतरे और गिरते भूजल स्तर से बड़े संकट का सामना कर रहे हैं. गांव में मवेशियों के चारागाह खत्म हो रहे हैं. तालाब, नहर और अन्य जलाशय सूखते जा रहे या उन पर कब्जे हो चुके हैं. लेकिन ऐसी ही परेशानियों पर सिर्फ चिंता की बजाय कुछ लोग बिना सरकार के सहयोग के जल संरक्षण की मुहिम चला रहे हैं.ऐसा ही एक संगठन जलाधिकार फाउंडेशन ने यूपी, हरियाणा के कई गांव-कस्बों के साथ दिल्ली के इलाकों की तस्वीर बदली है. उनकी इस मुहिम में डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, इंजीनियर, बिजनेसमैन और एडवोकेट भी शामिल हैं.  

20 से ज्यादा जलाशयों का निर्माण

दरअसल, शहरों से पीने के पानी का कारोबार गांव-कस्बों तक फैला तो समाज के प्रबुद्ध तबके के कुछ लोगों ने इसके खिलाफ 2012 में आवाज उठाई, लेकिन फिर 2015 में सकारात्मक रास्ता अपनाकर जल संरक्षण की मुहिम के साथ तालाब बनाने, उन्हें नहरों से जोड़ने और जंगल खड़े करने के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण का अभियान छेड़ा. आज ये संगठन हरियाणा के चरखी दादरी, भिवानी जैसे जिलों में 20 से ज्यादा बड़े जलाशयों का निर्माण कर चुका है.

उत्तर प्रदेश में बड़ा वेटलैंड किया तैयार

यूपी में आगरा, मथुरा के बीच बड़ा जलाशय के लिए जमीन मुक्त कराई. दिल्ली के द्वारका और ग्रेटर नोएडा चेरी काउंटी सेक्टर 3 में ऐसे ही जलाशयों का निर्माण संगठन करा चुका है. चरखी दादरी में दोहका दीना, नरसिनी जोड़ और हरोड़ा में जलाशय, सरोवर बनाए. भिवानी में जूही खुर्द और नांगला में ऐसे जलाशय बन रहे हैं.ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन में चेरी काउंटी के पास एक सूखे जलाशय को फिर से जिंदा करने के लिए नोएडा अथॉरिटी से मदद ली गई. पहले ये जलक्षेत्र गर्मी के 15 दिन में सूख जाता था.

Water Conservation

Water Conservation

जलाशय निर्माण के लिए कैसे काम

आज संगठन के पास यूपी, हरियाणा के तमाम गांवों से गुहार आती हैं. ऐसी ही चिट्ठियों पर वॉलंटियर्स गांव का दौरा करते हैं. जलाशय की जगह के लिए ग्राम पंचायतों से संपर्क साधा जाता है और फिर ग्राम सभा में बाकयदा प्रस्ताव पारित होता है. जलाशयों में साल भर पानी के लिए उन्हें नहरों से जोड़ने के लिए पाइपलाइन बिछाई जाती है. किसी का खेत आता है तो उसे अनुरोध कर रास्ता निकाला जाता है. नहरों में जब भी अतिरिक्त पानी होता है तो उस पानी को जलाशयों में लाया जाता है. आसपास पौधरोपण भी बड़े पैमाने पर किया जाता है, ताकि पशुओं के आराम और चारागाह की सुविधा हो. 

हरियाणा में नहरों के जाल से मदद

संगठन के डायरेक्टरों में से एक सीए कैलाश गोदुका का कहना है कि हरियाणा के चरखी दादरी जिले में कांकरवाला, चाचूवाना, लख्मीर जोहड़ कैलाश सरोवर, शिवधाम सरोवर, डूडीवाला जोहड़, हिन्दोखला-पीपलवला में जलाशय बने हैं.भिवानी जिले में  नंगला 1-2 जोहड़ , जुई कलां जोहड़, खलील जोहड़ 1-2, में भी ऐसे जलाशय बन रहे हैं. इन जोहड़ों के साथ लगती हजार एकड़ बणियों में पौधारोपण की जिम्मेदारी संगठन के वॉलटियर्स के हाथों में है. स्थानीय गांवों की ग्राम सभाओं की कमेटियां बनाकर उन्हीं के साथ लोकल बायोडाइवर्सिटी का संरक्षण कर रहे हैं. हरियाणा में नहरों का जलाशय है, ऐसे में तालाबों के निर्माण में मदद मिली.

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट आदिदेव कुमार वर्मा ने कहा कि हमने दिल्ली, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा जलाशयों (वॉटर बॉडीज) का निर्माण एवं पुनर्जीवन कर पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल भी मौलिक अधिकार है. हम यह बताना चाहते हैं कि जागरूकता, ग्रामीणों के सहयोग और संवेदनशीलता से जल संकट दूर किया जा सकता है. हम देशवासियों से इस मुहिम से जुड़ने और पानी के व्यावसायीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान करता हैं.

जल संरक्षण मुहिम की फंडिंग

संगठन अपने किसी पदाधिकारी या सदस्य को सैलरी नहीं देता. सिर्फ उन मजदूरों को मजदूरी दी जाती है, जो तालाब या ऐसे ही अन्य कामों के लिए खुदाई वगैरा का काम करते हैं. बाकी लोग वॉलंटियर्स की तरह संगठन से जुड़े हैं.  संगठन के डायरेक्टर सीए कैलाश गोदुका का कहना है कि यही उनके समूह की ताकत है. बिना किसी हित के जुड़ाव ही हमारी मजबूती है.

Water Harvesting

दोहका दिना गांव में दिखा चमत्कार

हरियाणा के दोहका दिना गांव में ऐसे ही जलाशय से बड़ा बदलाव दिखा. आज वहां जलाशय से जलस्तर 15 फीट ऊपर आ गया, जो कभी 25 फीट नीचे चला गया था. जलाशय में पर्याप्त पानी होने से स्प्रिंकल या ट्यूबवेल लगाकर पानी की सप्लाई होती है. पानी का टीडीएस 850 से कम होकर 450 आ चुका है. अब ये पानी पीने लायक हो गया है.

हमने उन गांवों चुना है, जिन्हें केंद्र और हरियाणा सरकार द्वारा डार्क जोन घोषित हैं, जहां पानी पाताल तक पहुंच गया है और 5-10 साल में जहां पानी बिल्कुल ही नहीं मिलेगा. हमने ऐसे संकटग्रस्त गांवों को चुना. हमने जलाशयों के निर्माण के साथ जंगल लगाकर उसे बायोडाइर्सिटी से जोड़ा है. इससे इंसानों के साथ जीवों और इकोसिस्टम में बदलाव में आया है. चरखी दादरी और भिवानी के 9 गांवों में हम बदलाव लाए हैं. एक साल में हमें 17 गांव में पानी पहुंचाना है. हरोदा और दोका दिहना में 3 साल में हमारे काम से 40 से 60 फीट जलस्तर बढ़ा है. पीएच लेवल बेहतर हुआ है.

मीत मान

जलाधिकार फाउंडेशन

मथुरा-आगरा में बड़ा जलाशय तैयार

मथुरा-आगरा के बीच जोधपुर झाल क्षेत्र में बहुत बड़ा एरिया खाली कराया गया. यहां 150 एकड़ की जमीन कराने के लिए दिनों जिलों के जिलाधिकारी की मदद ली गई. ओखला नहर से पानी का इंतजाम कराया गया और यहां बड़ा जलाशय तैयार है. अब यूपी सरकार यहां वेटलैंड बना रही है. 

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जलाशयों के लिए कैसे फंडिंग

इन जलाशयों की खुदाई, पाइपलाइन बिछाने, पौधरोपण जैसे कामों के लिए संगठन को कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों से फंडिंग भी मिली है. गोदुका का कहना है हम गांवों में जलाशयों के निर्माण का एस्टीमेट तैयार करके कंपनियों से संपर्क साधते हैं. मित्सुबिसी कॉरपोरेशन, मेटल वन, नुपुर फिल्टरेशन जैसी कंपनियों से अनुदान मिला है. कई समाजसेवी भी योगदान देते हैं. कोई धन से योगदान देता है तो मेहनत करने वाले सैकड़ों वॉलंटियर हैं.

Water Bodies

दिल्ली में वॉलंटियर्स की 250-300 संख्या है. हरियाणा में सरपंचों, ग्रामीणों के साथ स्कूली छात्र-छात्राएं स्वयंसेवी के तौर पर जुड़े हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीजीडीएवी कॉलेज से छात्र अपना योगदान देते हैं. आगरा में अंबेडकर यूनिवर्सिटी भी इस मुहिम से जुड़ी है. एक बड़ी कंपनी से 17 जलाशय के लिए 2.5 करोड़ का बजट बनाया गया है. 

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