

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर “विदेशी मदद” से सत्ता में आने और सत्ता में बने रहने का आरोप लगाकर राहुल गांधी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इस हमले पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने कहा है- यह बेहद हास्यास्पद है क्योंकि खुद राहुल गांधी विदेशी धरती पर जाकर भारत के घरेलू मामलों में दखल देने की भीख मांगते रहे हैं और आज वही दूसरों पर उंगली उठा रहे हैं.बीजेपी का कहना है कि आज विदेशी दखल की बात उठाने वाले राहुल गांधी खुद 2023 में लंदन दौरे के दौरान भारत के लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा चुके हैं.
बीजेपी का सीधा हमला, राहुल के बयानों को बताया कोरा झूठ
बीजेपी प्रवक्ता सीआर केशवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी के दावों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की आदत बन चुकी है कि वह हर बार एक नया झूठ गढ़ते हैं, लेकिन उनका यह घटिया झूठ हमेशा उन पर ही उल्टा पड़ जाता है. बीजेपी के मुताबिक विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह की मनगढ़ंत और बेबुनियाद बातें करके देश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.
Rahul Gandhi is such a lousy con artist that his third-rate lies always backfire and end up humiliating him. In 2023, while speaking in London ahead of the Lok Sabha elections, it was Rahul Gandhi who had pleaded and sought foreign interference in India’s internal affairs, stating, “It is not just an Indian battle.” Why has Congress ducked and dodged addressing the allegations of Smt. Sonia Gandhi serving as Co-President Forum of Democratic Leaders in the Asia-Pacific, which backed the idea of Kashmir as an independent nation and has close links to George Soros? Why have Rahul Gandhi and the Congress maintained a shady silence on their close association to with entities and individuals like Hindenburg, Cornelia Woll, who are intrinsically linked with organisations funded by George Soros? Why does Rahul Gandhi often disappear away on foreign trips? Who does he secretly meet and what is the agenda of these clandestine meetings ? The nation demands an answer from Rahul Gandhi because he is LOP and the secrecy shrouding his foreign trips pose a serious threat to our national security.
— C.R.Kesavan (@crkesavan) November 3, 2026
लंदन में विदेशी दखल की भीख मांगने का पुराना इतिहास
बीजेपी ने राहुल गांधी के दावों पर पलटवार करते हुए उनके मार्च 2023 के लंदन दौरे का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल दिया है. केशवन ने याद दिलाया कि लोकसभा चुनाव से पहले जब राहुल गांधी लंदन गए थे, तब उन्होंने ब्रिटिश सांसदों और थिंक टैंक के सामने भारत के घरेलू मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की पैरवी की थी. बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने विदेशी धरती पर खड़े होकर खुलेआम कहा था कि भारत की लोकतांत्रिक लड़ाई सिर्फ हमारे देश की नहीं है, बल्कि यह बहुत बड़ी लड़ाई है जिसमें विदेशी ताकतों को अपनी भूमिका निभानी चाहिए. बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी के उसी लंदन दौरे का एक पुराना वीडियो क्लिप भी साझा किया है जो कांग्रेस की दुखती रग बन चुका है. इस वीडियो में राहुल गांधी को यह कहते सुना जा सकता है कि यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि अमेरिका और यूरोपीय देश जैसे लोकतंत्र के स्वघोषित रखवाले भारत के लोकतंत्र को खत्म होते हुए चुपचाप देख रहे हैं. राहुल गांधी ने वहां कहा था कि भारत का विपक्षी दल जिस लड़ाई को लड़ रहा है, वह सिर्फ भारत की लड़ाई नहीं है बल्कि दुनिया के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण लड़ाई है, जिसे बीजेपी विदेशी दखल की खुली मांग मानती है.
कश्मीर की आजादी चाहने वाले गुट और सोरोस से क्या है रिश्ता
इस विवाद में बीजेपी ने केवल राहुल गांधी ही नहीं बल्कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है. केशवन ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा कि आखिर कांग्रेस पार्टी इस सच से क्यों भाग रही है और इस पर चुप्पी क्यों साधे हुए है कि सोनिया गांधी ‘फोरम ऑफ Democratic Leaders in the Asia-Pacific’ (FDL-AP) नाम के संगठन की को-प्रेसिडेंट के रूप में काम कर चुकी हैं.
उन्होंने सीधे सवाल दागा कि आखिर कांग्रेस और उनके शीर्ष नेताओं का जॉर्ज सोरोस जैसे विवादित व्यक्तियों से क्या कनेक्शन है जो लगातार भारत के लोकतंत्र और यहां की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की साजिशें रचते रहते हैं.
हिंडनबर्ग और राहुल के विदेश दौरों पर सवाल
बीजेपी प्रवक्ता ने भारतीय कंपनियों के खिलाफ एजेंडा चलाने वाली अमेरिकी संस्था हिंडनबर्ग रिसर्च और जर्मनी की प्रोफेसर कोर्नीलिया वोल के साथ राहुल गांधी के संपर्कों को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि आखिर राहुल गांधी और कांग्रेस उन ताकतों और लोगों के साथ अपनी करीबी साठगांठ पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं जो सीधे तौर पर जॉर्ज सोरोस के पैसों से चलने वाले संस्थानों से जुड़े हुए हैं और भारत की आर्थिक साख को चोट पहुंचाना चाहते हैं. बीजेपी ने राहुल गांधी के अचानक होने वाले बिना बताए विदेशी दौरों को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए इसे एक गंभीर मुद्दा बताया है. केशवन ने सवाल उठाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर होने के बावजूद राहुल गांधी अक्सर अचानक विदेशों में क्यों गायब हो जाते हैं. उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी विदेशों में जाकर चुपके से किन लोगों से मिलते हैं और इन बेहद गोपनीय मुलाकातों का असली एजेंडा क्या होता है, इसका जवाब देश की जनता को मिलना ही चाहिए.
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कैसे शुरू हुआ यह नया सियासी बवंडर
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर देशवासियों को संबोधित किया था. पीएम मोदी ने अपने भाषण में जनता को आगाह करते हुए कहा था कि कुछ निराशावादी ताकतें लगातार विदेशों में जाकर देश के खिलाफ साजिशें रच रही हैं. पीएम मोदी ने पूछा था कि आखिर कौन लोग विदेशों में जाकर गुपचुप तरीके से बैठकें कर रहे हैं, भारत विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं और देश के दुश्मनों की भाषा कौन बोल रहा है, इन सब पैटर्न्स को देश की जनता को पहचानना होगा और सोशल मीडिया के जरिए देश को बदनाम करने की कोशिशों को मिलकर नाकाम करना होगा.
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