

आजकल किसी से मिलना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. एक ऐप डाउनलोड कीजिए, राइट स्वाइप कीजिए, और बातचीत शुरू. लेकिन इसके साथ ही एक नई कन्फ्यूजन भी सामने आई है, जिसे एक्सपर्ट्स ‘Choice Paralysis’ यानी ‘चॉइस पैरालिसिस’ कह रहे हैं. इसमें सामने वाले से बातचीत ठीक चल रही होती है, लेकिन मन फिर भी पूरी तरह उस रिश्ते में नहीं उतर पाता. ऐसा नहीं है कि सामने वाला इंसान गलत है, बल्कि दिमाग किसी और वजह से ठहर नहीं पा रहा होता. आइए जानते हैं आखिर चॉइस पैरालिसिस है क्या और आजकल की जेनरेशन में क्यों ट्रेंड कर रहा है. इसकी जानकारी रिलेशनशिप एक्सपर्ट और फ्लटर (Flutrr) के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर कौशिक बनर्जी ने दी है.
क्या है Choice Paralysis?
चॉइस पैरालिसिस एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें बहुत ज्यादा ऑप्शन होने की वजह से इंसान किसी एक पर टिक नहीं पाता है. डेटिंग ऐप्स पर स्क्रीन में लगातार नए प्रोफाइल, नए मैच और नई एक्सपेक्टेशन्स दिखती रहती हैं. इससे दिमाग ये मानने लगता है कि सामने वाला इंसान कभी भी फाइनल ऑप्शन नहीं है, क्योंकि अगला मैच बस एक स्वाइप दूर है. फिर नतीजा ये होता हैै कि कोई भी बातचीत पूरी तरह सीरियस नहीं लगती, और रिश्ते से पहले ही ध्यान भटक जाता है. ये किसी एक व्यक्ति के व्यवहार की बात नहीं है, बल्कि आज की पूरी जेनरेशन में ये पैटर्न तेजी से देखा जा रहा है.
इसे कैसे पहचानें?
इस ट्रेंड के कुछ आम लक्षण होते हैं जैसे किसी अच्छी कन्वर्सेशन के बीच में भी दूसरे ऐप या प्रोफाइल चेक करने की आदत, किसी के साथ प्लान बनाने से पहले ये सोचना कि क्या कोई बेहतर ऑप्शन मौजूद है, या फिर बातचीत अच्छी चलने के बावजूद उसे आगे ले जाने से बचना. कई बार लोग ये भी महसूस करते हैं कि वे किसी के साथ समय बिताते हुए भी पूरी तरह मौजूद नहीं होते, क्योंकि मन कहीं और अटका रहता है.
क्यों बढ़ रहा है इसका ट्रेंड?
1. दिमाग हमेशा तुलना में लगा रहता है
साइकोलॉजिस्ट्स की मानें तो, जब सामने बहुत सारे ऑप्शन होते हैं, तो इंसान फ्रीडम महसूस नहीं करता, बल्कि उलझन में पड़ जाता है. मन हर पल ये सोचता रहता है कि शायद कोई बेहतर ऑप्शन अभी बाकी है, इसलिए मौजूदा बातचीत को पूरी तरह अपना नहीं पाता. यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी दुकान में बहुत सारे कपड़े देखने के बाद फैसला लेना मुश्किल हो जाता है
2. पुरानी चोट भी बनती है वजह
कई बार इसके पीछे पहले का कोई टूटा हुआ रिलेशन छिपा होता है. किसी का दिल पहले टूटा होता है, किसी ने बिना कोई वजह बताए रिश्ता छोड़ दिया होता है, या घर में देखे गए किसी टूटे हुए रिश्ते की छाया मन पर बनी रहती है. जब कोई नया, अच्छा इंसान सामने आता है, तो डर अक्सर उस इंसान से नहीं होता. डर होता है खुद को पूरी तरह खोलने से, अपनी कमजोरियों के साथ दिखने से, औैर ये मानने से कि यह रिश्ता भी टूट सकता है.
3. ऐप्स के डिजाइन भी हैं जिम्मेदार
जब ऐप पर लगातार नए प्रोफाइल दिखते रहते हैं, तो हर बातचीत में काफी कम मन लगता है, क्योंकि अगला ऑप्शन सिर्फ एक स्वाइप दूर होता है. यही कारण है कि बहुत से लोग किसी अच्छे इंसान से मिलने के बाद भी उतना जुड़ नहीं पाते जितना वे चाहते हैं.
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