
काठमांडू :
नेपाल में मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने इसकी जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी. एनसीएस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके भूकंप की जानकारी दी.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, “नेपाल में मंगलवार को भारतीय समयानुसार रात 9.38 बजे 5.0 तीव्रता का भूकंप आया. इसका केंद्र अक्षांश 29.022, देशांतर 83.978 पर, 143 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का स्थान काठमांडू, नेपाल से 196 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में दर्ज किया गया है.”

भूकंप का केंद्र जमीन से 143 किलोमीटर की गहराई में होने के कारण इसके झटके दूर-दूर तक महसूस होने की आशंका है, हालांकि राहत की बात यह है कि गहराई अधिक होने से सतह पर नुकसान की संभावना कम हो जाती है. फिलहाल, नेपाल से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। नेपाल भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील जोन में आता है.
असम में भी भूकंप के झटके
इससे पहले शाम को असम में भी भूकंप का झटका महसूस किया गया था. एनसीएस ने इससे पहले पोस्ट करके बताया, “मंगलवार को भारतीय समयानुसार रात 8.29 बजे 2.3 तीव्रता का भूकंप आया. इसका केंद्र अक्षांश 26.373, देशांतर 90.159 पर, 8 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का स्थान कोकराझार, असम में दर्ज किया गया है, जो मेघालय के तुरा से 95 किलोमीटर उत्तर में है.”
असम में आया भूकंप कम तीव्रता का था. रिक्टर स्केल पर 2.3 तीव्रता को हल्का भूकंप माना जाता है, जो अक्सर बिना किसी नुकसान के गुजर जाता है। इसका केंद्र कोकराझार जिले में 8 किलोमीटर की उथली गहराई में था.
नेपाल में बाढ़ के बाद रेस्क्यू जारी
हाल ही में नेपाल में भयानक बाढ़ आई. इस बाढ़ में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. वहीं हजारों लोग लापता हैं. नेपाल में अभी तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. इस भीषण बाढ़ ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहे विशाल बांध समेत इलाके में चीन की कई पनबिजली परियोजनाओं को गहन जांच के दायरे में ला खड़ा किया है.
एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता
चीन के विशेषज्ञों का कहना है कि हाल में आई आपदा में वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का योगदान हो सकता है. चीन के जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, यह आपदा कई कारकों के संयुक्त प्रभाव का नतीजा हो सकती है, जिनमें बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, स्थानीय भूगर्भीय एवं भौगोलिक परिस्थितियां तथा व्यापक जलवायु परिवर्तन शामिल हैं.
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई इस आपदा की शुरुआत हिमस्खलन से हुई थी और उसके बाद पानी व मलबे का भारी बहाव भोटेकोशी नदी के रास्ते नीचे की ओर आया, जिससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही हुई. इस घटना में 1,350 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं. चीन के अधिकारियों के अनुसार, चीन की ओर इस अचानक आई बाढ़ में 43 लोगों की मौत हुई है, जबकि 519 लोग अब भी लापता हैं. लापता लोगों में 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय हैं.
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