धर्म

धनतेरस के साथ शुरू होगा दीपोत्सव: इस वर्ष 5 नहीं पूरे 6 दिनों का होगा महापर्व, 8 नवंबर को मनेगी दीपावली


Deepotsav 2026: हिंदू धर्म में आस्था, उमंग और प्रकाश का प्रतीक दीपावली महापर्व इस वर्ष पांच नहीं बल्कि छह दिनों का होगा. कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होने वाला यह महापर्व भैयादूज तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा.

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, तिथियों के संयोग के कारण इस वर्ष दीपोत्सव 6 दिनों तक चलेगा. महापर्व का शुभारंभ 6 नवंबर को धनतेरस के साथ होगा और समापन 11 नवंबर को भाईदूज के साथ होगा.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम 14 वर्षों का वनवास काटकर और लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे. उनके आगमन की प्रसन्नता में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर में दीप जलाकर स्वागत उत्सव मनाया था, जिसके बाद से प्रतिवर्ष दीप जलाने की यह मंगल परंपरा अनवरत चली आ रही है.

6 दिनों के दीपोत्सव का संपूर्ण कैलेंडर

6 नवंबर (शुक्रवार): धनतेरस (धन-त्रयोदशी), धन्वंतरि जयंती एवं दीपदान प्रारंभ

7 नवंबर (शनिवार): नरक व रूप चतुर्दशी, छोटी दीपावली एवं श्री हनुमान जयंती

8 नवंबर (रविवार): दीपावली महापर्व, श्री महालक्ष्मी-गणेश पूजन

9 नवंबर (सोमवार): रामा-श्यामा, स्नान-दान अमावस्या

10 नवंबर (मंगलवार): गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव

11 नवंबर (बुधवार): भैया दूज (भाई-दूज / यम द्वितीया)

6 नवंबर: धनतेरस पर खरीदारी और दीपदान से होगी शुरुआत

पांच दिवसीय दीपोत्सव का पहला दिन धनतेरस (धन त्रयोदशी व धन्वंतरि जयंती) के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसी कारण इस दिन नए बर्तन, सोने-चांदी के आभूषण व चल-अचल संपत्ति खरीदने की परंपरा है. माना जाता है कि इस दिन की गई शुभ खरीदारी में तेरह गुना वृद्धि होती है. इसी दिन शाम को यमराज के निमित्त दीपदान कर दीप प्रज्वलन का क्रम शुरू होगा.

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे से
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:48 बजे तक

7 नवंबर: रूप चतुर्दशी और श्री हनुमान जयंती

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चौदस, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी और छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता है. इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा होती है तथा अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए घर के विभिन्न कोनों में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं.

शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा (अर्द्धरात्रि) में माता अंजनी के गर्भ से पवनपुत्र हनुमान जी का प्राकट्य हुआ था:

आश्विनस्यासिते पक्षे भूतायां च महानिशि. भौमवारेऽञ्जनादेवी हनूमन्तमजीजनत्..

चूंकि 7 नवंबर 2026 को चतुर्दशी तिथि निशीथकाल-व्यापिनी है, अतः उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार श्री हनुमान जयंती इसी दिन मनाई जाएगी.

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर, सुबह 10:38 बजे से
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर, सुबह 11:29 बजे तक

8 नवंबर: प्रदोषकाल में होगी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा

इस वर्ष कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को प्रदोषकाल में व्यापिनी रहेगी, जिसके कारण दीपावली का मुख्य पर्व रविवार, 8 नवंबर को ही मनाया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या में स्थिर लग्न तथा स्थिर नवमांश में करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है.

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:29 बजे से
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे तक

लक्ष्मी पूजा के प्रमुख शुभ मुहूर्त:

प्रदोष काल (लग्न): शाम 05:36 से रात 08:02 बजे तक

वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 06:04 से रात 08:01 बजे तक

अति शुभ संयुक्त मुहूर्त: सायं 06:16 से 06:28 एवं सायं 06:52 से 07:05 बजे तक (प्रदोषकाल, स्थिर वृषभ लग्न व कुंभ का स्थिर नवमांश)

सिंह काल (निशीथ लग्न): मध्यरात्रि 12:34 से देर रात 02:50 बजे तक

9 नवंबर: रामा-श्यामा, स्नान-पूजा और दान की अमावस्या

परंपरानुसार दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है, किंतु इस बार 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी. धर्मशास्त्रीय नियमों के अनुसार यह पूरा दिन अमावस्या के रूप में मान्य रहेगा, जिससे गोवर्धन पूजा अगले दिन संपन्न होगी. 9 नवंबर का दिन ‘रामा-श्यामा’ के रूप में मनाया जाएगा. इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर गले मिलते हैं, ‘राम-राम सा’ कहकर पर्व की बधाइयां देते हैं तथा आपस में प्रेम व सौहार्द बांटते हैं.

10 नवंबर: गोवर्धन पूजा पर अर्पित होगा 56 भोग, बंटेगा अन्नकूट

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्रदेव का मानमर्दन कर गोवर्धन पर्वत धारण करने और राजा बलि पर भगवान वामन की विजय के उपलक्ष्य में गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है. इस दिन गोवर्धन पर्वत, गायों और भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा कर छप्पन भोग लगाए जाते हैं.

धर्मसिंधु और शास्त्र वचनों के अनुसार: यदि नवमुहूर्तो नास्ति तदा बलिपूजागोक्रीडागोवर्धन पूजा-मार्गपाली-बंधनयष्टिकाकर्षणानि पूर्वविद्धा प्रतिपदि कार्याणि..

शास्त्र निर्णय के आधार पर इस वर्ष गोवर्धन पूजा व अन्नकूट पर्व 10 नवंबर 2026 को ही शास्त्रसम्मत रूप से आयोजित होगा. इस अवसर पर जगह-जगह नवधान्य से बने पर्वत शिखरों का भोग लगाकर अन्नकूट प्रसाद का वितरण किया जाएगा.

11 नवंबर: भैयादूज पर बहनें करेंगी भाइयों का मंगल तिलक

दीपोत्सव का समापन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भैयादूज (यम द्वितीया / भ्रातृ द्वितीया) के साथ होगा. भविष्य पुराण के अनुसार, इसी तिथि पर यमुना जी ने अपने भाई यमराज को आदरपूर्वक अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया था.

मान्यता के अनुसार, इस दिन भाइयों को अपने घर भोजन न करके बहनों के घर जाकर भोजन ग्रहण करना चाहिए तथा बहनें भाइयों के माथे पर मंगल तिलक कर उनकी दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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