
मध्य प्रदेश (MP News) के देवास जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाली, लेकिन जिंदगी का एक बड़ा फलसफा सिखाने वाली तस्वीर सामने आई है. आम तौर पर श्मशान घाट पर चीख-पुकार और मातम का सन्नाटा होता है, लेकिन बागली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम करोंदिया (Karondia Village) में नजारा बिल्कुल उलट था. यहां एक 100 वर्षीय बुजुर्ग के निधन पर परिवार ने आंसू बहाने के बजाय ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और नाच-गाने के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी.
श्मशान घाट को गुब्बारों और फूलों से सजाया
जानकारी के मुताबिक, 100 साल के इन बुजुर्ग का 28 अगस्त को इंदौर में इलाज के दौरान निधन हो गया था. जब कल उनका शव पैतृक गांव करोंदिया लाया गया, तो परिवार ने तय किया कि इस विदाई में गम नहीं होना चाहिए.
शवयात्रा के लिए डोल (विमान) को विशेष तौर पर बेहद खूबसूरती से सजाया गया. जब शवयात्रा निकली, तो नाती-पोते और पूरे परिवार के लोग रोने के बजाय नाचते-गाते हुए अपने बुजुर्ग को उनके अंतिम सफर पर विदा करने निकले. हैरानी की बात यह रही कि श्मशान घाट को भी किसी पार्टी या उत्सव की तरह गुब्बारों (Balloons) और फूल-मालाओं से सजाया गया था.
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मुंह में शराब का भोग और श्मशान में आतिशबाजी
इस अनोखे अंतिम संस्कार में कुछ ऐसी रस्में भी निभाई गईं, जिसने पूरे क्षेत्र के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. चिता को मुखाग्नि देने से ठीक पहले, एक विशेष रस्म के तहत बुजुर्ग के मुंह में शराब डाली गई और शराब का ही भोग लगाया गया. इसके बाद श्मशान घाट पर ही जमकर आतिशबाजी (Fireworks) भी की गई.
क्यों मनाया गया जश्न?
परिवार का मानना है कि बुजुर्ग ने अपने जीवन के पूरे 100 वर्ष (100 Years of Life) जिए और एक बेहद भरा-पूरा और संतुष्ट जीवन देखा. उनके जाने का दुख मनाने के बजाय, उनके इस शानदार ‘शतक’ और पूर्ण जीवन के समापन को एक उत्सव (Celebration) के रूप में मनाया गया. देवास में हुई यह अनोखी शवयात्रा इलाके भर में चर्चा का विषय बनी हुई है.
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