
मुंबई:
Shiv Sena Foundation Day: शुक्रवार को महाराष्ट्र में शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस मना. इस मौके पर शिवसेना के दोनों गुट उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने अलग-अलग दावे किए. एक ने बाघ, शेर, भौंकने वाले कुत्तों और एक ऐसे सियासी ट्रेलर की बात की जिसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी थी. दूसरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की और कहा कि अगर उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं है तो मैं पद छोड़ने को तैयार हूं. साथ ही चेतावनी दी कि शिवसेना को ‘चोरों और गद्दारों’ के हाथों में न जाने दिया जाए.
पार्टी का स्थापना दिवस और दोनों गुटों में यह टकराव तय हुआ जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चा है. सांसदों के इस कदम से उस फूट के और गहराने का खतरा है जिसने पहली बार 2022 में महाराष्ट्र की राजनीति को बदल दिया था, जब शिंदे ने ठाकरे के खिलाफ बगावत की थी और आखिरकार पार्टी के नाम और उसके मशहूर ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न पर कब्जा किया था.
एकनाथ शिंदे का संदेश- अभी तो बस ट्रेलर, फिल्म आनी बाकी
मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, शिंदे ने अपने गुट को बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत का असली उत्तराधिकारी बताने की कोशिश की. शिंदे ने कहा, ‘यह तो बस एक ट्रेलर है. पूरी फिल्म अभी आनी बाकी है. आज, आपके सामने एक बाघ खड़ा है. कुछ कुत्ते भौंकते रहते हैं. कल और परसों भी वे भौंकते रहेंगे. मैं आपको एक बात बताता हूं, कुत्ते झुंड में भौंकते हैं, लेकिन शेर अकेला आता है. कुत्ते भौंकते रहते हैं जबकि बाघ शिकार करता है. कुत्ते भौंकते रहते हैं, जबकि बाघ दहाड़ता है. यही शिवसेना है. और आज यह शिवसेना महाराष्ट्र में मजबूती से खड़ी दिखाई दे रही है.”

शिवसेना स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे.
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आत्म मंथन कीजिए, क्यों सब छोड़ रहे… बिना नाम ठाकरे पर शिंदे का वार
ठाकरे का नाम लिए बिना शिंदे ने सवाल किया कि विरोधी गुट के नेता और कार्यकर्ता उसे क्यों छोड़ रहे हैं? उन्होंने कहा, “कुछ लोग कहते रहते हैं, ‘अगर कोई जाना चाहता है, तो उसे खुशी-खुशी जाने दो.’ उन्हें देखिए- वे रोज बकवास करते हैं. ठीक है, उन्हें जाने दीजिए. लेकिन अब तो सब छोड़ कर जा रहे हैं. वे क्यों जा रहे हैं? जरा आत्म-मंथन और आत्म-निरीक्षण तो कीजिए.”
आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ, बाकी मेरे पीछे आओ… असरानी के डॉयलॉग से शिंदे का वार
शिंदे ने अपने विरोधियों पर तंज कसने के लिए हिंदी फिल्म ‘शोले’ के एक मशहूर डायलॉग का जिक्र किया. उन्होंने पूछा, “क्या आपको फिल्म ‘शोले’ का असरानी का वो डायलॉग याद है? ‘आधे लोग इधर जाओ, आधे लोग उधर जाओ, और बाकी मेरे पीछे आओ.’ लेकिन उनके पीछे कौन है? कोई नहीं. उनके पास बस कांटे और चम्मच ही बचे हैं. ऐसी पार्टी कैसे टिक सकती है?”
बाला साहेब की राजनीतिक विरासत का असली उत्तराधिकारी हमः शिंदे
इसके बाद उन्होंने एक और तंज कसा. शिंदे ने दावा किया, “आपके पैरों के नीचे जमीन नहीं है, हैरानी की बात यह है कि आपको अभी भी असका एहसास नहीं है.” अपने पूरे भाषण के दौरान, शिंदे ने उस मुख्य सवाल का जवाब देने की कोशिश की जो शिवसेना के बंटवारे के बाद से ही चर्चा का विषय रहा है — बालासाहेब ठाकरे की असली राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी कौन है?
उपमुख्यमंत्री ने 2022 में उद्धव ठाकरे से अलग होकर बीजेपी के साथ गठबंधन करने के अपने फैसले का भी बचाव किया. शिंदे के अनुसार, विरोधियों ने राजनीतिक बर्बादी की भविष्यवाणी की थी और दावा किया था कि वह अपने गांव लौटकर खेती करने लगेंगे. इसके उलट, उन्होंने तर्क दिया कि उनके गुट ने महाराष्ट्र विधानसभा में अपनी ताकत बढ़ाई है.
उद्धव ठाकरे की भावुक अपील- मैं योग्य नहीं तो पद छोड़ने को तैयार
दूसरी ओर उद्धव ठाकरे ने शिवसेना स्थापना दिवस के मौके पर अपने समर्थकों के सामने एक अलग तरह का भाषण दिया. उन्होंने कहा, ‘आज मेरा मन सचमुच दुखी है. अगर आपमें से किसी को भी लगता है कि मैं इस पद के लायक नहीं हूं, तो मुझे सीधे मेरे मुंह पर बताएं. मैं अभी इसी वक्त इस पद से हटने को तैयार हूं.’

शिवसेना स्थापना दिवस के मौके पर बेटे आदित्य के साथ उद्धव ठाकरे.
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चोर-गद्दारों को शिवसेना नहीं हथियाने देना मेरा मकसदः ठाकरे
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उन्हें सत्ता या पद का कोई मोह नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मेरा बस एक ही पक्का इरादा है, एक ही ज़िद है, यह शिवसेना – जो सोने से भी ज़्यादा कीमती है – इसे कभी भी चोरों और गद्दारों के हाथों में पिछले दरवाजे से नहीं जाने दिया जाना चाहिए. अगर आपमें से कोई सच्चा शिव सैनिक है जो नेतृत्व करने के लायक है, तो वह आगे आए. मैं पूरे दिल से उसका स्वागत करूंगा और उसे अपना पूरा समर्थन दूंगा. मुझे किसी पद का कोई मोह नहीं है, न ही सत्ता की कोई भूख है. मैं आज भी पार्टी का नेतृत्व छोड़ने को तैयार हूं.”
6 सांसदों की बगावत के बीच स्थापना दिवस में चली जुबानी जंग
ठाकरे की ये बातें उन खबरों पर उनकी पहली बड़ी प्रतिक्रिया थीं जिनमें कहा गया था कि शिवसेना (UBT) के छह सांसद पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं. बताते चले कि शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के बागी सांसदों में संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टिकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर हैं. ये सभी गुरुवार को ठाकरे गुट की ओर से दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे औपचारिक रूप से अलग होने की अटकलों को और बल मिला.
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लेखक के बारे में
वसुधा वेणुगोपाल
सम्पादक – राजनीति





