

नई दिल्ली. जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन और छात्र आंदोलन के बीच चल रहे गतिरोध में गुरुवार को विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की प्रक्रिया के लिए पहली बार तय समयसीमा घोषित कर दी. इसके साथ ही आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने का भी फैसला किया गया है. रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ (जेएमआईएसयू) का संविधान 15 मई 2027 तक मंजूर कर लागू किया जाएगा. इसके बाद जुलाई 2027 के मध्य तक चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और करीब छह सप्ताह के भीतर मतदान कराया जाएगा. गुरुवार की टाइमलाइन के मुताबिक, पोलिंग अगस्त 2027 के बीच में होगी.
दरअसल, छात्र लंबे समय से चुनाव की तारीख तय करने की मांग कर रहे थे. 26 अक्टूबर को जारी आदेश में प्रशासन ने संविधान मंजूर होने के 15 दिन बाद चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई थी. इसी वजह से आंदोलनकारी छात्रों ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और धरना जारी रखा था.
नए आदेश में प्रशासन ने छात्रों की एक और प्रमुख मांग मानते हुए प्रदर्शन के दौरान जारी किए गए शो-कॉज नोटिस, अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन, निष्कासन और कैंपस में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध वापस लेने की घोषणा की है. विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्रसंघ संविधान लागू होने के बाद लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव संबंधी अधिसूचना जारी की जाएगी.
2006 के बाद नहीं हुए चुनाव
जामिया छात्रसंघ 2006 में भंग कर दिया गया था. तब से विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं. प्रशासन का कहना रहा है कि उस दौर में हुई हिंसक घटनाओं के बाद यह फैसला लिया गया था. वहीं वर्षों से छात्र संगठन छात्रसंघ बहाली की मांग उठाते रहे हैं. छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर जामिया में दो सप्ताह से अधिक समय से आंदोलन चल रहा है. इसी दौरान विश्वविद्यालय को कक्षाएं और परीक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित करनी पड़ीं. अब प्रशासन को उम्मीद है कि नई समयसीमा घोषित होने के बाद आंदोलन खत्म हो जाएगा.
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