
नई दिल्ली:
भारत में पहली बार निजी हेलीपोर्ट के लिए PinS इंस्ट्रूमेंट अप्रोच प्रक्रिया को मंजूरी मिली है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश के उंडावल्ली हेलीपोर्ट के लिए देश की पहली प्राइवेट पॉइंट इन स्पेस इंस्ट्रूमेंट एप्रोच प्रोसीजर को मंजूरी दी है. आई ने प्रक्रिया तैयार की है और DGCA ने इसे मंजूरी दी है. इसे DGCA के नियमों और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के मानकों के अनुसार विकसित किया गया है.
PinS तकनीक क्या है?
यह एक आधुनिक सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली है. इसकी मदद से हेलिकॉप्टर ऐसे हेलीपोर्ट पर भी सुरक्षित तरीके से उतर सकते हैं, जहां पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम या अन्य ग्राउंड नेविगेशन सुविधाएं नहीं होतीं. इससे खराब मौसम, कम दृश्यता और दूर-दराज के इलाकों में भी हेलिकॉप्टर संचालन सुरक्षित और आसान होगा.

क्या होंगे फायदे?
- खराब मौसम में भी हेलिकॉप्टर सुरक्षित तरीके से उड़ान भर और उतर सकेंगे
- दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी
- मौसम की वजह से उड़ान रद्द या प्रभावित होने की घटनाएं कम होंगी
- हेलिकॉप्टर सेवाएं अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बनेंगी
किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ?
इस तकनीक का फायदा इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (एयर एम्बुलेंस), आपदा राहत और बचाव अभियान, धार्मिक यात्रा, पर्यटन, ऑफशोर ऑपरेशन, कॉर्पोरेट हेलिकॉप्टर सेवाएं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सहित कई क्षेत्रों को मिलेगा.

मंत्री ने बताया कि पिछले सप्ताह भारत ने स्वदेशी GAGAN सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली के जरिए किसी वाणिज्यिक विमान की पहली सफल प्रिसिजन अप्रोच का प्रदर्शन किया था. अब PinS प्रक्रिया की मंजूरी उसी दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है.
सरकार का कहना है कि उंडावल्ली हेलीपोर्ट के बाद देश के अन्य हेलीपोर्ट पर भी ऐसी PinS प्रक्रियाएं विकसित की जाएंगी. इससे भारत में सैटेलाइट आधारित नेविगेशन का इस्तेमाल बढ़ेगा, हेलिकॉप्टर सेवाएं और सुरक्षित होंगी तथा भारतीय विमानन प्रणाली वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचेगी.
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