

मध्य प्रदेश के बालाघाट से शुरू हुई चावल हेराफेरी की जांच के बीच भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने इस मामले पर अपना आधिकारिक पक्ष रखा है. केंद्रीय एजेंसी ने मीडिया में चल रही उन खबरों को “तथ्यहीन और पूरी तरह बेबुनियाद” बताया है, जिनमें 1160 करोड़ रुपये के चावल घोटाले की बात कही जा रही थी. एफसीआई ने साफ किया है कि जांच का दायरा पूरे स्टॉक पर नहीं, बल्कि केवल 5.63 लाख रुपये मूल्य के चावल पर है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स X पर जारी एक आधिकारिक बयान में भारतीय खाद्य निगम ने मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है. एफसीआई का कहना है कि साल 2024-25 से अब तक डिस्टिलरीज को कुल 5.39 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल जारी किया गया है. खबरों में जिस 1160 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा किया जा रहा है, वह दरअसल 5 लाख मीट्रिक टन चावल की वह वास्तविक कीमत है जो डिस्टिलरीज ने वैध तरीके से भुगतान करके एफसीआई से खरीदी थी. इस पूरी राशि को हेराफेरी मान लेना पूरी तरह भ्रामक है.
महज 490 बोरियों की हेराफेरी की जांच
केंद्रीय एजेंसी के मुताबिक, वर्तमान में चल रही जांच एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत सप्लाई किए गए पूरे चावल से संबंधित नहीं है. यह मामला केवल 490 बोरी (लगभग 242.50 क्विंटल) चावल के कथित डायवर्जन से जुड़ा हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5.63 लाख रुपये है. ऐसे में पूरे एथेनॉल कार्यक्रम के वैध चावल की कीमत को घोटाले से जोड़ना गलत है.
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— Food Corporation of India (@FCI_India) July 13, 2026
सरकारी तंत्र ने खुद पकड़ा मामला, मिल ब्लैकलिस्ट
एजेंसी ने साफ किया कि इस गड़बड़ी को किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं, बल्कि खुद सरकारी निगरानी तंत्र ने पकड़ा था. जून 2026 के पहले सप्ताह में परिवहन के दौरान अनियमितता सामने आते ही एफसीआई ने संबंधित डिस्टिलरी को नोटिस जारी किया था. इसके बाद राज्य खाद्य विभाग ने 5 जून 2026 को ही एफआईआर दर्ज करा दी थी. इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल यानि SIT का गठन किया है. साथ ही गड़बड़ी में शामिल राइस मिल पर 44.12 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है.
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क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुई जांच
पुलिस एफआईआर और बालाघाट कलेक्टर की गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, एथेनॉल प्लांटों के लिए करीब 2320 रुपये प्रति क्विंटल की रियायती दर पर दिया गया सरकारी चावल कथित रूप से निजी राइस मिलों को बेचा जा रहा था. आरोप है कि प्लांट संचालकों ने इसे मिलर्स को 2600 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक में बेचकर मुनाफा कमाया. यह खेल तब सामने आया जब बालाघाट के एफसीआई गोदाम से एवीजे एग्रीको के एथेनॉल प्लांट के लिए निकले तीन ट्रकों में से एक ट्रक स्थानीय संचेती राइस मिल के अंदर पाया गया.
पुलिस और एसआईटी की कार्रवाई जारी
बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के अनुसार, सूचना मिलने पर राजस्व, खाद्य और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर ट्रक को जब्त किया था. इसके बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर 20 से 25 सदस्यों की एक एसआईटी बनाई गई. पुलिस अब तक इस मामले में रिकॉर्ड खंगालने के साथ ही 50 से अधिक बयान दर्ज कर चुकी है. मामले में 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 13 से अधिक आरोपी पुलिस के निशाने पर हैं. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और ट्रकों की आवाजाही के रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं.
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