
ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने ऐतिहासिक गन हिल (पॉइंट 5140) तक खास अभियान चलाया. यह चोटी द्रास सेक्टर पर नजर रखने वाली अहम जगह है. यह द्रास-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब पांच किलोमीटर दूर है.
इस अभियान का मकसद 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और पेशेवर कौशल को सम्मान देना था. ऑपरेशन विजय के दौरान पॉइंट 5140 रणनीतिक तौर से बेहद अहम था. इस ऊंचाई से दुश्मन पूरे इलाके पर नजर रखता था. इसे कब्जे में लेना जरूरी था. इससे द्रास क्षेत्र पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिली और दुश्मन की दूसरी चौकियों तक पहुंच भी बाधित हुई.
तोपखाने और पैदल सेना ने मिलकर जीती लड़ाई
पॉइंट 5140 पर अंतिम हमला करने से पहले भारतीय सेना ने आसपास की कई चोटियों पर कब्जा किया. 13 और 14 जून 1999 की रात 18 ग्रेनेडियर्स ने ‘हंप’ नाम की चोटी पर कब्जा किया. इसके बाद 13 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स ने ‘रॉकी नॉब’ पर हमला किया.
इस कार्रवाई में बोफोर्स तोपों ने सीधी फायरिंग कर सेना का साथ दिया. सटीक गोलाबारी में दुश्मन के तीन बंकर और कई ठिकाने नष्ट कर दिए गए. 14 जून की शाम तक ‘रॉकी नॉब’ भारतीय सेना के कब्जे में था.

20 जून 1999 को फहराया तिरंगा
19 और 20 जून 1999 की रात पॉइंट 5140 पर अंतिम हमला किया गया. इससे पहले ‘शत्रुनाश’ नाम की खास तोपखाना योजना लागू की गई. इसमें बोफोर्स तोपों और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चरों से दोनों ओर से भारी गोलाबारी की गई. इससे दुश्मन की रक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ गई.
इसके बाद 13 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स के जवान आगे बढ़े. उन्होंने 20 जून की सुबह करीब पांच बजे पॉइंट 5140 पर कब्जा कर लिया. आसपास की अन्य चोटियां भी भारतीय सेना के नियंत्रण में आ गईं. इसे ऑपरेशन विजय का बड़ा मोड़ माना जाता है.
17 हजार फीट पर बना इतिहास
इस लड़ाई में भारतीय सेना ने एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया. करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद मजबूत दुश्मन चौकी पर बिना किसी सैनिक को खोए कब्जा कर लिया गया. ऊंचाई वाले युद्ध के इतिहास में यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.
कारगिल युद्ध में तोपखाना रेजिमेंट के निर्णायक योगदान को देखते हुए 2023 में पॉइंट 5140 का नाम बदलकर गन हिल रखा गया.
वीरों की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास
इस साल के अभियान में 1999 के ऑपरेशन विजय के दौरान तोपखाना कार्रवाई में शामिल इकाइयों के 25 सैनिकों ने भाग लिया. इसके अलावा स्थानीय सैन्य इकाइयों के 101 सैनिक भी अभियान में शामिल हुए. सेना के अनुसार, यह अभियान केवल पर्वतारोहण नहीं है. यह वीर सैनिकों की याद, सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक है. इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को साहस, कर्तव्य, निस्वार्थ सेवा और देशभक्ति की भावना से प्रेरित करना है.
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