
नई दिल्ली:
गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी रामास्वामी वेंकट सुबरा मणि ने एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में कई बड़े खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय में सेवा के दौरान कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुझसे हिंदू आतंकवाद के मामले खोजने को कहा था. हालांकि मैंने उनसे कहा कि देश में ऐसा कोई मामला नहीं है.
आरवीएस मणि ने स्मिता प्रकाश के पोडकॉस्ट में कहा कि 2010 तक, जब मैं इंटरनल सिक्योरिटी डिवीज़न में था, तो किसी भी फ़ाइल में ‘हिंदू टेरर’ शब्द का ज़िक्र नहीं था. जून 2006 में, दिग्विजय सिंह ने मुझसे उन मामलों के बारे में जानकारी निकालने को कहा था, जिनमें हिंदू आतंकवाद शामिल हो. फिर मैंने उनसे कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं है.
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“Narendra Modi and Amit Shah Were the Targets in the Ishrat Jahan Case.”
“None of the Files Had the Term ‘Hindu Terror’ Until 2010.”
“Digvijaya Singh Asked Me to… pic.twitter.com/J4CkBVTMxk
— ANI (@ANI) July 12, 2026

26/11 की तुलना समझौता एक्सप्रेस हमले से करने को लेकर आरवीएस मणि ने कहा कि ये INC (इंडियन नेशनल कांग्रेस) और ISI के बीच एक फिक्स्ड मैच था. भारत में राजनेताओं को ऐसा करने से क्या फ़ायदा होता? पूरी कहानी का मकसद इसे सिर्फ़ एक हिंदू हमला दिखाना था. कसाब के हाथ में भी कलावा था, अगर तुकाराम ओंबले ने उसे पकड़ा या मारा न होता, तो आज इसे भी हिंदू आतंकवादी हमला माना जाता.
वहीं इशरत जहां एनकाउंटर केस पर उन्होंने कहा कि मेरे सीनियर अधिकारियों ने इसे राजनीतिक नेताओं की हत्या के मामले में बदल दिया था. अगर मुझे ठीक से याद है, तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह ही निशाने पर थे.

उन्होंने कहा कि बेअंत सिंह हत्याकांड में मैं भारत सरकार का एकमात्र गवाह हूं. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से क्या अहम सबक है? इस सवाल पर आरवीएस मणि ने कहा कि प्रधानमंत्री विकसित भारत, स्वस्थ भारत और कुशल भारत की बात करते हैं. मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को ‘सुरक्षित भारत’ की भी घोषणा करनी चाहिए.
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