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बंगाल में ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, तीन पूर्व सांसदों ने थामा बीजेपी का दामन | Former TMC Rajya Sabha MP Sushmita Dev Sukhendu Sekhar Ray and Prakash Chik Baraik Join BJP



पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है. तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसमें सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देब और प्रकाश चिक बड़ाईक शामिल हैं.  बीजेपी के सीनियर नेता और बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने तीनों नेताओं के बीजेपी जॉइन करने की आधिकारिक घोषणा की है.

इन नेताओं के पार्टी में शामिल होने पर बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह वाकई बहुत खुशी की बात है. इतने बड़े नेता आज भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा जता रहे हैं. वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

‘दो साल में बदल जाएगा बंगाल की तस्वीर’

BJP में शामिल होने के बाद TMC की पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी है. इसलिए मैं यहां राज्यसभा सीट की उम्मीद में नहीं आई हूं, बल्कि बंगाल की एक निवर्तमान सांसद के तौर पर आई हूं. जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और ‘डबल-इंजन’ सरकारों वाले राज्यों में जो काम हुआ है, वह नकारा नहीं जा सकता. कोई भी इसे झुठला नहीं सकता. मैं पश्चिम बंगाल के लोगों से कहना चाहती हूं कि मुख्यमंत्री सुवेंदु बाबू और प्रधानमंत्री मोदी को बस दो साल दें. आप देखेंगे कि जिस तरह असम और त्रिपुरा की तस्वीर बदली है, उसी तरह पश्चिम बंगाल की तस्वीर भी पूरी तरह बदल जाएगी.”

क्या बोले सुखेंदु रॉय?

बीजेपी में शामिल होने के बाद टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा, “इस सरकार ने घोषणापत्र में शामिल हर एजेंडा पर तेजी और जोश के साथ काम करना शुरू कर दिया है. आम जनता इससे खुश है. आगे और भी काम होंगे और इसीलिए हम बहुत उम्मीद और खुशी से भरे हुए हैं.”

सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि देश में 800 सांसद हैं. उन 800 में से मैं अकेला ऐसा व्यक्ति था जिसने सार्वजनिक रूप से मांग की थी कि RG कर घटना से जुड़े सबूतों के साथ जिस तरह छेड़छाड़ की जा रही थी, उसे देखते हुए पुलिस कमिश्नर और संस्थान के प्रिंसिपल से कस्टोडियल पूछताछ होनी चाहिए, यानी उन्हें गिरफ्तार करके पूछताछ की जानी चाहिए, किसी और में यह कहने की हिम्मत नहीं थी. मुझे एक ही दिन में दो बार नोटिस भेजकर लालबाजार बुलाया गया. मैंने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किया, मैंने कभी नहीं कहा कि मैं नहीं जाऊंगा. मैं बहुत बीमार था.

उन्होंने आगे कहा कि मुझे कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. उसके बाद भी लगातार तीन या चार महीनों तक मुझे फोन पर धमकियां मिलती रहीं कि मुझे मार दिया जाएगा और मेरी बेटी और पोती का अपहरण कर लिया जाएगा. मैं उस समय इस्तीफा दे सकता था, लेकिन मुझे डर था कि वे मेरी हत्या के लिए कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को काम पर रख सकते हैं, क्योंकि बंगाल में 400 से ज्यादा BJP कार्यकर्ताओं और समर्थकों की हत्या हो चुकी थी. यह डर और दहशत का माहौल था.





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